रुचिका के पिता ने कहा चौटाला, व्यवस्था ने राठौर को बचाया
पिछले 19 वर्षो में पहली बार मीडिया के सामने आए गिरहोत्रा ने कहा कि उनका परिवार अब भी हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एस. पी. एस. राठौर और इस शीर्ष पुलिस अधिकारी की मदद करने वाली प्रणाली से खौफजदा है।
रुचिका की मित्र आराधना के अभिभावकों- आनंद और मधु प्रकाश- के निवास पर गिरहोत्रा ने पत्रकारों से कहा, "हम परिवार के लिए सुरक्षा चाहते हैं। यदि हमें अब भी भयभीत किया जाता है तो हम सरकार से सुरक्षा देने के लिए कहेंगे।"
चण्डीगढ़ से 10 किलोमीटर दूर हरियाणा के इस शहर-पंचकुला- में 12 अगस्त, 1990 को हुई दुर्व्यवहार की घटना के बाद से ही आनंद और मधु प्रकाश यह मुकदमा लड़ रहे हैं।
गिरहोत्रा ने कहा, "चौटाला उनका साथ देने वाले मुख्य व्यक्ति थे। राठौर उन्हें (चौटाला को) उनके सभी गलत कामों से बाहर निकाल लेते थे। यहां तक कि आर. आर. सिंह (1990 में हरियाणा के डीजीपी) द्वारा अपनी रिपोर्ट में राठौर के खिलाफ मामला दर्ज करने का सुझाव देने के बाद भी सरकार ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की थी।"
एक बैंक के सेवानिवृत्त प्रबंधक गिरहोत्रा अपनी बेटी के साथ हुए दुर्व्यवहार की घटना और इसकी वजह से उनके परिवार को जिस दौर से गुजरना पड़ा उसे याद करते हुए रो पड़े।
केंद्रीय जांच ब्यूरो की एक विशेष अदालत ने सोमवार को राठौर को दोषी ठहराते हुए उन्हें छह महीने की कैद व 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। उन्हें अदालत से तुरंत जमानत भी मिल गई थी।
गिरहोत्रा कहते हैं कि वह और उनका परिवार राठौर को केवल छह महीने की कैद की सजा मिलने से बहुत आहत हैं।
उन्होंने कहा, "मेरी बेटी के साथ दुर्व्यवहार हुआ, उसे प्रताड़ित किया गया और उसे मरने के लिए मजबूर किया गया था। मेरे बेटे आशु को परेशान किया गया और उसे झूठे मामलों में फंसाया गया। विभिन्न अदालतों ने इन सभी मामलों को रद्द कर दिया था। हमें हर स्तर पर परेशान किया गया। पंचकुला छोड़ने के बाद शिमला और अन्य जगहों पर हम जहां भी गए राठौर ने हमारा पीछा किया। "
राठौर को उनके अपराध के अनुरूप ही सजा देने की मांग कर रहे गिरहोत्रा ने कहा कि यह बहुत आवश्यक है ताकि इस देश के बच्चे सुरक्षित हो सकें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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