झारखण्ड फिर राजनीतिक अनिश्चितता की ओर, झामुमो के पास सत्ता की कुंजी (लीड-5)

कुल 81 सीटों वाली झारखण्ड विधानसभा के लिए पांच चरणों में संपन्न हुए चुनावों में अब तक घोषित 74 परिणामों के मुताबिक किसी भी दल या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है। कांग्रेस और झारखण्ड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक) गठबंधन ने सर्वाधिक 24 सीटों पर सफलता हासिल की है। कांग्रेस अब तक 11 सीटें जीत चुकी है जबकि दो पर उसने बढ़त बना रखी है। झाविमो को 10 सीटों पर सफलता मिली है और उसने भी एक सीट पर बढ़त हासिल की हुई है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। उसने अब तक 17 सीटें जीत ली है और दो सीटों पर बढ़त बनाई हुई है जबकि उसकी सहयोगी जनता दल (युनाइटेड) को दो सीटों पर सफलता मिली है।

झामुमो ने इस विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। 17 सीटों पर उसके उम्मीदवार चुनाव जीत चुके हैं और एक पर बढ़त बनाए हुए हैं।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को चार सीटों पर सफलता मिल चुकी है और एक सीट पर उसे बढ़त हासिल है। पूर्व मंत्री सुदेश महतो के नेतृत्व वाली ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) ने भी इस चुनाव में अपनी ताकत बढ़ाई है। उसे चार सीटों पर सफलता मिली है। आठ अन्य पार्टियों तथा निर्दलीय उम्मीदवारों को भी जीत मिली है।

राज्य में झामुमो एक निर्णायक दल के रूप में उभरा है। नतीजों से उत्साहित झामुमो ने ऐलान किया है कि वह उसी गठबंधन का साथ देगा जो उनके नेता शिबू सोरेन को बतौर मुख्यमंत्री स्वीकार करेगा।

पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने आईएएनएस से कहा, "हम उन्हीं लोगों का समर्थन करेंगे जो सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने में हमारा साथ देंगे।"

केंद्रीय खाद्य व प्रसंस्करण मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुबोध कांत सहाय ने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट हो जाना चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मौजूदा परिस्थिति में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।" जबकि कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा, "झामुमो और राजद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के घटक नहीं हैं लेकिन दोनों ही दलों ने केंद्र में संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन दिया है।"

उधर भाजपा ने स्वीकार किया कि चुनावी नतीजे अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहे। पार्टी की झारखण्ड इकाई के अध्यक्ष रघुबर दास ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "राजनीति में कोई अछूत नहीं होता। कांग्रेस छोड़ किसी भी दल से गठबंधन के लिए हमारे दरवाजे खुले हैं।"

पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा ने जगन्नाथपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल कर ली है जबकि विधानसभा अध्यक्ष आलमगीर आलम पाकुड़ विधानसभा से चुनाव हार गए। मधु कोड़ा सरकार में मंत्री रहे सात उम्मीदवारों को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।

राज्य में पांच चरणों में संपन्न चुनाव के दौरान कुल 58 प्रतिशत मतदान हुआ था। पहले चरण का मतदान 25 नवंबर और आखिरी चरण का मतदान 18 दिसम्बर को हुआ था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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