कांग्रेस और वाम दल गुजरात में अनिवार्य मतदान के खिलाफ
कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा कि मतदान करने के लिए बाध्य किया जाना निजी अधिकारों का उल्लंघन है। अहमद ने आईएएनएस से कहा, "मैं महसूस करता हूं कि अनिवार्य मतदान निजी अधिकारों का उल्लंघन है। इस मामले में किसी को मजबूर कर देने वाला उपाय नहीं अपनाया जाना चाहिए।"
गुजरात विधानसभा में शनिवार को स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान अनिवार्य किए जाने के विधेयक को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे 'लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक कदम' करार दिया।
अहमद ने कहा कि अनिवार्य मतदान के मसले पर पार्टी में चर्चा नहीं की गई है लेकिन किसी को मतदान करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार के इस कदम से समस्याएं बढ़ेंगी क्योंकि जो लोग मतदान करने नहीं जाएंगे उन्हें अनुपस्थिति के लिए प्रमाण पत्र पेश करने को कहा जा सकता है।
अहमद ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी उम्मीदवार को मत नहीं देना चाहता तो वह मतदान केंद्र नहीं जाने का फैसला कर सकता है।
लोकसभा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता बासुदेव आचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी गुजरात सरकार के इस कदम का समर्थन नहीं करती।
उन्होंने कहा, "लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए लेकिन उन पर दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए, हम इस विधेयक के खिलाफ हैं।
आचार्य से जब पूछा गया कि क्या कि उनकी पार्टी राज्यपाल से यह आग्रह करेगी कि वे इस विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को भेजें, इस पर उन्होंने कहा कि इस बारे में पार्टी में चर्चा नहीं की गई है।
कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया (भाकपा) के नेता गुरुदास दासगुप्ता ने भी कहा कि लोगों को मतदान के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हम गुजरात सरकार को सतर्क कर रहे हैं कि लोगों को मतदान के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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