बुजुर्ग पर्वतारोही के लिए बुरा सपना साबित हुआ जलवायु सम्मेलन
काठमांडू, 18 दिसम्बर (आईएएनएस)। डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में आयोजित जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन के परिणाम को लेकर जहां विश्व भर में बहस हो रही है वहीं एवरेस्ट पर फतह करने वाला नेपाल का एक बुजुर्ग पर्वतारोही इसे एक बुरे सपने की तरह याद रखेगा।
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाला 78 वर्षीय बुजुर्ग पर्वतारोही मीन बहादुर सेरचन अभी भी कोपेनहेगन से नेपाल लौटने पर हुए बुरे अनुभव को नहीं भूल पा रहे हैं।
सेरचन कोपेनहेगन में 11 दिसम्बर को एवरेस्ट पर्वतारोहियों के सम्मेलन में हिस्सा लेने गए थे। वहां नेपाल से लगभग 30 पर्वतारोही पहुंचे थे। इन सभी ने जलवायु परिवर्तन के खतरे के प्रति विश्व को सचेत करने के लिए रैली में हिस्सा लिया। यह रैली नेपाल सरकार के अभियान का हिस्सा थी।
कोपेनहेगन में रैली में हिस्सा लेकर सोमवार को जब सेरचन नेपाल पहुंचे तो त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनकी अगुवाई करने के लिए कोई नहीं पहुंचा।
वरिष्ठ नागरिक माउंट एवरेस्ट अभियान नामक समूह के प्रवक्ता नंद बहादुर सिंह ने आईएएनएस से कहा, "मैं अचंभित था। यह जानकर भी कि सेरचन कम सुनते हैं और उनकी उम्र काफी हो गई है, तो भी उन्हें कोई हवाई अड्डे पर लेने नहीं पहुंचा। हम उन्हें कहीं भी अकेले जाने नहीं देते हैं।"
सिह ने कहा, "सेरचन अकेले टैक्सी स्टेंड गए लेकिन उनसे लोगों ने मनमाने पैसे मांगे, जिसके बाद वह अपना सामान लेकर पैदल ही बस पकड़ने निकल पड़े।"
सेरचन सोमवार शाम बस से ललितपुर पहुंचे, जहां कुछ लुटेरों ने उनसे सभी मूल्यवान सामान लूट लिया। सिंह ने कहा, "हम इस घटना से क्षुब्ध हैं। एक व्यक्ति, जिसने देश का नाम रोशन किया, जो कोपेनहेगन सरकारी मेहमान के रूप में गया, उसके साथ ऐसी घटना से हम दुखी हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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