डेनमार्क के रुख के कारण कोपेनहेगन वार्ता में गतिरोध (लीड-1)
कोपेनहेगन, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन के मसले पर जारी शिखर सम्मेलन में गुरुवार को वार्ता में अवरोध उत्पन्न हो गया।
गरीब देशों के अनुरोध की अनदेखी करते हुए मेजबान देश द्वारा अपने 'राजनीतिक घोषणापत्र' पर जोर देने की वजह से यह गतिरोध बना।
पर्यावरण मंत्री मंत्री जयराम रमेश ने कहा, "अब दोषारोपण का सिलसिला शुरू हो जाएगा, लेकिन विकासशील देशों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।"
डेनमार्क के प्रधानमंत्री लार्स लोक्के रासमुस्सेन ने विकासशील देशों के किसी भी पर्यावरण मंत्री को राजनीतिक घोषणापत्र का मसौदा दिखाने से इंकार कर दिया। वह इस घोषणापत्र का मसौदा गुरुवार शाम को शासनाध्यक्षों की बैठक में पेश करने वाले हैं।
सम्मेलन में वार्ताकार क्योटो संधि और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दीर्घकालिक सहयोग के अग्रिम समझौतों पर काम कर रहे थे। गतिरोध का असर इस वार्ता पर भी पड़ेगा।
रमेश ने कहा, "हमने कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन को सफल बनाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन इसकी प्रक्रिया बहुत दोषपूर्ण रही। डेनमार्क की सरकार ने गंभीर प्रयास नहीं किए।"
रमेश ने कहा, "हमने डेनमार्क सरकार से बार-बार मसौदा दिखाने का अनुरोध किया। उन्होंने हर बार हमें उसे दिखाने का वादा किया, लेकिन वादा पूरा नहीं किया। हमने भरोसा करके काम किया, लेकिन उन्होंने जानबूझकर विलंब किया क्योंकि वे इसे सीधे राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष ही पेश करना चाहते थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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