राजनीतिक संकट से प्रभावित हो रहा तेलुगू फिल्म उद्योग
तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और छात्रों के समूहों द्वारा पूरे क्षेत्र में 'एकीकृत आंध्र' के आंदोलन में शामिल हुए कलाकारों और उनके पारिवारिक सदस्यों की फिल्मों के प्रदर्शन का विरोध किया जा रहा है।
अभिनेता से राजनेता बने के. चिरंजीवी के पृथक तेलंगाना के खिलाफ होने की वजह से उन्हें तेलंगाना-समर्थक समूहों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
अभिनेता ने तय किया है कि वह राज्य के विभाजन का विरोध करेंगे। इस पर तेलंगाना-समर्थक तेलंगाना क्षेत्र के हैदराबाद और नौ अन्य जिलों में उनकी और उनके बेटे व अन्य पारिवारिक सदस्यों की फिल्मों का प्रदर्शन रोक रहे हैं।
जाने-माने अभिनेता निर्देशक मोहन बाबू और एन. हरीकृष्णा के 'एकीकृत आंध्र' आंदोलन में शामिल होने के बाद उन्हें और उनके पारिवारिक को भी निशाना बनाया गया है।
बॉलीवुड के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा तेलुगू फिल्म उद्योग तेलंगाना में पूरी तरह बहिष्कार के खतरे का सामना कर रहा है। तेलुगू फिल्म उद्योग में ज्यादातर लोग तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा क्षेत्र से आए हैं।
स्थितियों को देखते हुए उद्योग ने इस महीने और जनवरी की शुरुआत में प्रदर्शित होने जा रही फिल्मों का प्रदर्शन स्थगित कर दिया है।
इस घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब बुधवार को चिरंजीवी की प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी) ने निर्णय लिया कि वह पृथक तेलंगाना की मांग का विरोध करेगी।
पीआरपी के 14 विधायकों ने पहले ही विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। इसके बाद दबाव में आकर चिरंजीवी ने 'एकीकृत आंध्र' आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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