महिलाओं को युद्धक पायलट बनाने को लेकर असमंसज में है भारत
नई दिल्ली, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। यूं तो भारत महिला युद्धक पायलटों की भर्ती के मसले पर ऊहापोह में है, पर दुनिया के जिन चंद मुल्कों में महिलाओं को यह जिम्मेवारी सौंपी गई, वहां उनका प्रदर्शन शानदार रहा है और कुछ महिला पायलटों को तो उनकी प्रहारक क्षमता एवं दिलेरी के लिए 'रात की जादूगरनी' की संज्ञा भी दी गई।
महिलाओं को बंदिशों में जकड़े जाने के लिए कुख्यात पाकिस्तान और सैन्य महाशक्ति बनने की चाहत रखने वाले चीन में भी सेना में महिलाओं को पायलट के तौर पर भर्ती किया गया है।
सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की प्रमुख रंजना कुमारी कहती हैं, "अगर भारत की महिलाओं को भी इसी तरह प्रशिक्षित किया जाए तो वे भी बेहतरीन युद्धक पायलट बन सकती हैं। महिलाओं के साथ इसलिए भेदभाव नहीं किया जा सकता है कि वे महिला हैं। चीन में महिलाओं को पायलट बनाया गया है, जबकि अमेरिकी वायुसेना में कई महिला पायलट हैं। फिर भारत क्यों उलझन में है?"
इसी महीने रक्षामंत्री ए.के एंटनी ने संसद में कहा, "हमें इस पर उपयुक्त फैसला लेना होगा। पहले सेना में महिलाएं नहीं थीं। अब कई महिलाएं सेना में हैं। हम उनकी भूमिका का विस्तार करना चाहते हैं।"
इसे लेकर विवाद तब जोर पकड़ा जब वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल पी.के बरबोरा ने यह बयान दिया कि महिला युद्धक पायलटों की भर्ती आर्थिक रूप से व्यवहारिक कदम नहीं होगा।
पूर्ववर्ती सोवियत संघ में महिला पायलटों की तीन रेजीमेंट थीं और उनसे जर्मन सैनिक इतना डरते थे कि वे उन्हें रात की जादूगरनी कहा करते थे। इन पायलटों ने जर्मन सेना पर खूब कहर बरपाया था।
वैसे, अब रूसी सेना में कोई महिला पायलट नहीं है। अमेरिका ने 1993 में महिला युद्धक पायलटों को जंगी विमान उड़ाने की छूट दी थी। अमेरिकी वायुसेना के कुल 3,700 युद्धक पायलटों में 70 महिला पायलट हैं। इनमें से कई महिला पायलटों को अफगानिस्तान के मोर्चे पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने का मौका मिला।
उनकी साहस एवं सूझबूझ को खूब सराहा जाता रहा है। पूर्व वायुसेना प्रमुख एस.पी त्यागी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह जटिल मसला है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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