पाकिस्तानी अदालत ने 5 अमेरिकी मुसलमानों के प्रत्यर्पण पर रोक लगाई
समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक अपनी पहल पर याचिका दायर करने वाले एक मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील खालिद ख्वाजा का कहना है कि पूर्वी शहर लाहौर के उच्च न्यायालय ने गृह मंत्री और अन्य संबद्ध अधिकारियों से 17 दिसम्बर को नजरबंदियों पर एक रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
ख्वाजा ने कहा, "हमने अपनी याचिका में अनुरोध किया है कि चूंकि इन पांचों आदमियों को पाकिस्तान में पाकिस्तानी कानून के तहत नजरबंद रखा गया है इसलिए यदि वे दोषी होते हैं तो उन्हें पाकिस्तानी कानून के तहत पाकिस्तान में सजा दी जाना चाहिए।"
इन पांचों व्यक्तियों की उम्र 20 वर्ष के आसपास है। इन्हें लाहौर से 160 किलोमीटर दूर सरगोधा में गिरफ्तार किया गया था। अमेरिकी राज्य वर्जिनिया से एक समूह में पाकिस्तान आए इन लोगों को यहां आने के कई दिन बाद गिरफ्तार किया गया था।
संदिग्धों में से एक ने अपने पीछे एक वीडियोटेप भी छोड़ा है, जिसमें विदाई बयान में पश्चिमी और मुस्लिम जगत के बीच संघर्ष का संदर्भ दिया गया है।
पाकिस्तानी जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि यूनिवर्सिटी के पांचों छात्र अफगानिस्तान में जेहाद में हिस्सा लेने की योजना बना रहे थे और वे पाकिस्तान के अशांत कबायली इलाके में अफगान सीमा के समीप बुनियादी प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए आतंकवादी संगठनों से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे।
गृह मंत्री रहमान मलिक ने बीते सप्ताहांत में संकेत दिया था कि यदि ये पांचों लोग किसी भी पाकिस्तानी कानून के उल्लंघन के दोषी नहीं पाए जाते हैं तो हो सकता है कि उनका अमेरिका को प्रत्यर्पण कर दिया जाए।
पाकिस्तान, मिस्र, यमन और इरीट्रिया मूल के इन अमेरिकी नागरिकों से इस्लामाबाद में अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो और अमेरिकी दूतावास पूछताछ कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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