तेलंगाना की तर्ज पर पूर्वोत्तर में भी पृथक राज्यों की मांग

गुवाहाटी, 12 दिसम्बर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की पृथक तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा का असर पूर्वोत्तर राज्यों पर भी पड़ा है। यहां भी कई छोटे-छोटे राज्यों की मांग तेज हो गई है।

पूर्वोत्तर में बोडोलैंड, कार्बीलैंड, दीमाराजी, कमातापुर और गारोलैंड जैसे क्षेत्रों को राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग तेज हो गई है। यहां सक्रिय अलगाववादी गुट इन मांगों के जरिए लोगों की भावनाओं को अपने पक्ष में करना चाहते हैं।

सबसे जटिल स्थिति असम की हैं। यहां सक्रिय कई अलगाववादी गुट पृथक राज्यों की गठन की मांग करने लगे हैं।

प्रतिबंधित नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) अगल बोडोलैंड की मांग कर रहा है। दूसरी ओर दीमा हालोम दाओग (डीएचडी) दीमाराजी, कार्बी लोंगरी नार्थ कछार हिल्स लिबरेशन फ्रंट अपने लिए कार्बीलैंड की मांग कर रहा है।

अलगाववादी संगठन कमातापुर लिबरेशन आर्गेनाइजेशन (केएलओ) कमातापुर की मांग कर रहा है।

ऑल कूच राजबंशी स्टूडेंट्स यूनियन के नेता बिश्वजीत राय ने कहा कि अलग कमातापुर की मांग जायज है। एनडीएफबी ने भी एक बयान जारी कर कहा, "बोडोलैंड हमारी जन्मभूमि है और हम इसे प्राप्त करके रहेंगे।"

अलग गारोलैंड की मांग कर रहे मेघालय में सक्रिय अलगाववादी संगठन अचिक नेशनल वाल्यूंटर काउंसिल (एएनवीसी) ने कहा कि गारो जनजाति के लिए पृथक राज्य की आवश्यकता है।

एएनवीसी के नेता अरिस्त संगमा ने कहा, "हम चांद नहीं मांग रहे हैं। तेलंगाना के बाद गारोलैंड की मांग जायज है। "

उधर, असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा कि वह असम का बंटवारा नहीं चाहते। उन्होंने कहा, "हम असम का विभाजन नहीं चाहते हैं। हम शांति से साथ-साथ रहना चाहते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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