अमेरिका का कश्मीर पर मध्यस्थता से इंकार
अरुण कुमार
वाशिंगटन, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। कश्मीर मसले पर मध्यस्थ की भूमिका निभाने से इंकार करते हुए अमेरिका ने कहा है कि वह भारत और पाकिस्तान के लिए इस मसले का महत्व समझता है, लेकिन अंतत: इसका हल दोनों देशों को ही मिलकर निकालना होगा।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा कश्मीर पर अमेरिकी मध्यस्थता का सुझाव दिए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता पी. जे. क्राउली ने गुरुवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, "भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए हम कश्मीर मामले की अहमियत समझते हैं और इस बारे में हम दोनों देशों के साथ चर्चा भी करते रहे हैं, लेकिन हमारा मानना है कि यह एक ऐसा मसला है जिसका समाधान दोनों देशों को कश्मीर की जनता की सक्रिय भागीदारी से निकालना होगा।"
यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका इस प्रक्रिया में अपने लिए कोई भूमिका देखता है तो क्राउली ने कहा, "मैं इससे वाकिफ नहीं हूं कि हमें इस बिंदु पर कोई विशिष्ट भूमिका निभाने को कहा गया है।"
यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका इस प्रक्रिया में खुद के लिए पाकिस्तान के स्तर पर भी अपनी कोई भूमिका नहीं देखता तो प्रवक्ता ने कहा कि वह इस बात को यही विराम देना चाहते हैं।
यह पूछने पर कि क्या वह कश्मीर मसले के समाधान के लिए जरदारी के नजरिये से सहमत हैं तो उन्होंने कहा कि वह इसे राष्ट्रपति की स्वतंत्र राय के तौर पर देखना चाहेंगे।
समाचार पत्र 'न्यूयार्क टाइम्स' में प्रकाशित अपने लेख में जरदारी ने अमेरिका से कश्मीर मामले में मध्यस्थता कर भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी अविश्वास मिटाने में अपनी तटस्थता और इच्छा का प्रदर्शन करने की अपील की है।
जरदारी ने कहा कि पाक जनता का अमेरिका के प्रति अविश्वास की वजह क्षेत्रीय मसले, खास तौर पर भारत से जुड़ी नीतियां, भी रहे हैं। उन्होंने लिखा है, "मैं जानता हूं कि अमेरिका में धारणा है कि मेरा देश पाकिस्तान हमेशा से भारत को लेकर ही उलझा रहता है।"
उन्होंने लिखा है, "जिस तरह इजरायल-फिलीस्तीन मसला फिलीस्तानी हितों को तवज्जो दिए बगैर नहीं सुलझ सकता, उसी तरह कश्मीरी अवाम के हितों को ध्यान में रखकर इस मसले के समाधान के बगैर दक्षिण एशिया में स्थायी शांति की बहाली संभव नहीं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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