लिब्रहान रिपोर्ट पर राज्य सभा में नोकझोंक
नई दिल्ली। बाबरी विध्वंस पर आई लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच राज्यसभा में बुधवार को जमकर नोकझोक हुई। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय मजाक करार दिया तो वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने बाबरी विध्वंस की घटना को एक क्रूर कार्रवाई बताया।

भाजपा नेता अरूण जेटली ने कहा कि बाबरी विध्वंस पर आई लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट एक राष्ट्रीय मजाक है। जेटली ने कहा कि इसमें जरा भी आश्चर्य नहीं कि इसे लिखने की जिम्मेदारी कुछ दूसरे लोगों को सौंप दी गई हो। जेटली ने कहा, "यह रिपोर्ट पूरी तरह अविश्वसनीय है। यह एक बेकार दस्तावेज है और सच जानने की प्रक्रिया के साथ एक धोखा है। यह एक राष्ट्रीय मजाक है।"
सच का पता नहीं लगा रहा लिब्रहान आयोग
जेटली ने आगे कहा, "यह सच का पता लगाने वाला कोई मिशन नहीं है, बल्कि एक ऐसा आयोग है जिसने विचारधारा पर टिप्पणी की है।" जेटली ने रिपोर्ट के वास्तविक लेखक पर भी सवाल खड़ा किया। जेटली ने कहा कि न्यायमूर्ति लिब्रहान ने अपनी रिपोर्ट में हरप्रीत सिंह ज्ञानी को सबूतों का विश्लेषण कर उनका निष्कर्ष निकालने, रिपोर्ट को संपादित करने और भाषा को दुरुस्त करने में मदद देने के लिए धन्यवाद दिया है।
जेटली ने कहा, "ज्ञानी ने रिपोर्ट का विश्लेषण किया, निष्कर्ष निकालने और रिपोर्ट को संपादित करने में मदद की और बाकी काम न्यायमूर्ति लिब्रहान ने किया।" विपक्ष की इस टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों पर एक क्रूर साजिश के तहत बाबरी मस्जिद विध्वंस की कार्रवाई को अंजाम देने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस के नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "इस मामले में अटल बिहारी वाजपेयी, पी.वी.नरसिंह राव, तथ्यात्मक गड़बड़ी या लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट का लीक होना कोई केंद्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि असल मुद्दा यह है कि मस्जिद को किसने गिराया, क्यों गिराया और गिराने वालों ने इसे किस तरह गिराया।"
बाबरी विध्वंस पर आई लिब्रहान रिपोर्ट पर बहस में हिस्सा लेते हुए सिंघवी ने कहा कि भाजपा दस्तावेज पर चर्चा कर इस मामले के मुख्य मुद्दे से पीछा छुड़ा रही है। सिंघवी ने कहा कि भाजपा का अयोध्या अभियान बेशर्म व घटिया राजनीति का एक दुखद व तुच्छ नमूना है। इस बीच दो मुस्लिम सांसदों ने अयोध्या विवाद का कोई विवेकपूर्ण हल निकालने का आग्रह किया।
राजनीतिक दलों ने तीर चलाए
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के तारिक अनवर ने लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी भूमिका देश चलाने में निभानी है। मंदिर और मस्जिद का निर्माण करना उनका काम नहीं है। यह काम धार्मिक लोगों का है।
अनवर ने कहा, "हमें देश के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। हमें कई सारी चुनौतियां से निपटना है।" जनता दल (युनाइटेड) के अली अनवर अंसारी ने कहा कि इस विवाद का समाधान जल्द निकाला जाए, चाहे वह आपसी सहमति से हो अथवा कानून के द्वारा। अंसारी ने कहा, "हमें सहानुभूति नहीं चाहिए। हमें कानून के मुताबिक समानता चाहिए।" दोनों सांसदों ने इस बात की भी मांग की कि विध्वंस में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
यहीं पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने की ओर से मांग की गई कि बाबरी विध्वंस से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में कराई जाए और अदालत से इस मामले में जल्द फैसला देने का आग्रह किया जाए।
आपराधिक कृत्य था बाबरी विध्वंस
राज्यसभा में लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए माकपा के सीताराम येचुरी ने कहा कि 1992 में अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद का गिराया जाना 'एक आपराधिक कृत्य था और वोट की राजनीति का एक घिनौना नमूना था।' येचुरी ने कहा कि रिपोर्ट वैधानिक रूप से इस बात की पुष्टि करती है कि यह एक पूर्व नियोजित कार्रवाई थी, जिसे सटीक तरीके से अंजाम दिया गया।
उन्होंने कहा कि लिब्रहान रिपोर्ट पर सरकार द्वारा तैयार की गई कार्रवाई रिपोर्ट में आत्मविश्वास की कमी साफ झलकती है। यदि सरकार गंभीर है तो उसे अपने न्यायिक अधिकारियों के जरिए विध्वंस से जुड़े सभी मामलों को इकट्ठा करवाना चाहिए और मामले के जल्द निपटारे के लिए उसे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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