सम्मेलन में अमीर-ग़रीब का मुद्दा गर्माया

कोपेनहेगेन में लीक हुए दस्तावेज़ों से यह बात सामने आई है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर किसी संभावित समझौते के मामले में अमीर और विकासशील देशों के बीच गहरा मतभेद है.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सम्मलेन के दूसरे दिन ही मेज़बान देश डेनमार्क का मसौदा लीक हो गया. इसे अमीर देशों की ओर से तैयार किया गया है.

पर्यावरणविदों के मुताबिक़ यह मसौदा अमीर देशों के प्रति बहुत नरम है.

साथ ही इसमें विकासशील देशों को प्रयाप्त धन देने का भी सुझाव नहीं है ताकि वे बढ़ते तापमान का मुकाबला करने के उपाय लागू कर सकने में सक्षम हो सकें.

कोपेनहेगन में चल रहे इस सम्मलेन में दुनिया भर के 192 देश शामिल हुए हैं जहाँ पर्यावरण के मुद्दे खास तौर पर कार्बन उत्सर्जन में कटौती किए जाने के मुद्दे पर अहम समझौता होने की बात कही जा रही है.

डेनमार्क के इस मसौदे में उन सभी बातों को शामिल किया गया है जिनके ऊपर संयुक्त राष्ट्र में पिछले दो वर्षों से बातचीत होती रही है.

इसमें ये वादा किया गया है कि दुनिया भर के देश जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहे तापमान में बढ़ोत्तरी को दो फ़ीसदी से भी कम रखेंगे.

इसके लिए जहाँ विकसित देशों से कम और लंबे समय के दौरान भारी मात्रा में उत्सर्जन में कटौती का लक्ष्य तय करने की बात कही गयी है वहीं एक ऐसे कोष बनाने का सुझाव है जिसकी मदद से विकासशील देश जलवायु परिवर्तन से उठने वाली चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो सकें.

अलग श्रेणी

मगर आलोचकों का कहना है कि इस मसौदे में जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों की एक अलग श्रेणी बनाने का सुझाव है ताकि विकासशील देशों को बांटा जा सके.

उनके मुताबिक़ इसमें क्योटो प्रोटोकोल की अनदेखी की जा रही है.

पर्यावरण से जुडी संस्था फ्रेंड्स ऑफ़ अर्थ के कार्यकारी निदेशक एंडी एटकिन्स का कहना है कि यह मसौदा पहली नज़र में बहुत अच्छा दिखता है, पर है बहुत ख़तरनाक.

इस प्रस्ताव में एक बहुत ही अलग ढंग की बात कही जा रही है.

उनका कहना है कि अमीर देश गरीब मुल्कों को धन देंगे ताकि वे अपना कार्बन उत्सर्जन कम कर सकें लेकिन वह खुद इसे करने की बात नहीं कर रहे. जबकि वैज्ञानिक तरीके से देखें तो उन्हें खुद भी ऐसा करना चाहिए.

अमीर देशों को कम से कम 40 फ़ीसदी की कटौती करनी होगी.

एंडी एटकिन्स कहते हैं कि वे तापमान में बढ़ोत्तरी को दो सेंटीग्रेट से कम रखने की बात कर रहे हैं लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि अमीर देश इस पर किस तरह अमल करेंगे. यह बहुत ही ख़तरनाक है.

इस बीच चीन के वार्ताकार ने अमरीका, यूरोप और जापान के उत्सर्जन में कटौती की मात्रा की गहरी आलोचना की है.

सू वेई का कहना था कि प्रस्ताव में बताई गई दर उससे बहुत कम है जो वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन को खतरनाक मोड़ पर पहुँचने से रोकने के लिए ज़रूरी है.

इन सब मतभेदों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख ने कहा है कि इस सम्मलेन की सफलता के लिए एक अहम समझौते की ज़रुरत है.

उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे इस बात की पूरी कोशिश करें ताकि एक समझौते पर सहमति हो सके.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+