बेंगलुरू में विकलांगों को मिल रहा है रोजगार
बेंगलुरू, 8 दिसम्बर (आईएएनएस)। बेंगलुरू में अब विकलांगों को भी रोजगार मिल रहा है। 22 वर्षीय निशा पी. यहां के एक प्रसिद्ध कॉफी रेस्तरां में काम करती हैं और 28 वर्षीय मुरली सी. एक आईटी कंपनी में कार्यरत हैं। जब तक लोग यह नहीं जानते कि निशा सुन और मुरली देख नहीं सकते तब तक वे इनके काम को देखकर इनके और सामान्य लोगों के बीच कोई फर्क नहीं कर सकेंगे।
ये लोग बेंगलुरू में आए एक बड़े बदलाव को प्रतिबिंबित करते हैं। भारत की 'सिलिकॉन वैली' कहे जाने वाले बेंगलुरू में विकलांगों को दया पर नहीं बल्कि उनकी योग्यता के आधार पर रोजगार दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय नेत्रहीन संघ की कर्नाटक इकाई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एम. श्रीनिवास का कहना है, "बेंगलुरू की आईटी कंपनियों सहित निजी कंपनियां विकलांग लोगों को प्रशिक्षित करने और उन्हें रोजगार देने में रुचि दिखा रही हैं।"
श्रीनिवास ने आईएएनएस से कहा, "यद्यपि, एक बात को दिमाग में रखना जरूरी है कि कंपनियां सहानुभूति की वजह से नहीं बल्कि उनकी योग्यता की वजह से ऐसा कर रही हैं।"
संघ की कर्नाटक इकाई वर्ष 2000 से नेत्रहीन लोगों को कम्प्यूटर प्रशिक्षण देने वाला देश का पहला संगठन बन गई है।
राज्य सरकार के मुताबिक कर्नाटक की छह करोड़ की आबादी में 10 लाख लोग विकलांग हैं। इनमें से 400,000 लोग नेत्रहीन हैं।
इसके कोई आंकड़े नहीं हैं कि बेंगलुरू की कंपनियों में कितने लोगों को राजगार दिया गया है लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि निजी क्षेत्र उन्हें रोजगार देने का ईमानदार प्रयास कर रहे हैं।
श्रीनिवास ने कहा, "पिछले दो सालों में हमारी 'इम्प्लायमेंट एंड प्लेसमेंट सेल' के जरिए करीब 100 नेत्रहीनों को इंफोसिस, ऑरेकल, आईबीएम और सिस्को जैसी आईटी कंपनियों में रोजगार मिला है।"
आईबीएम की प्रबंधक ममता शर्मा कहती हैं, "हम विकलांगों को सहानुभूति के चलते रोजगार नहीं दे रहे हैं। वास्तव में वे बहुत मेहनती और योग्य हैं और आईटी उद्योग को उनके जैसे लोगों की आवश्यकता है।" आईबीएम में देशभर में करीब 200 विकलांग कर्मचारी काम करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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