'आरआईएल ने मांगी थी 2.34 डॉलर प्रति यूनिट पर गैस बेचने की अनुमति' (लीड-1)
नई दिल्ली, 8 दिसम्बर (आईएएनएस)। रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (आरएनआरएल) ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने पेट्रोलियम मंत्रालय से सरकारी कंपनी एनटीपीसी को 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस बेचने की अनुमति स्वयं मांगी थी।
आरएनआरएल ने कहा कि इस बारे में मंत्रिमंडलीय समूह के फैसले की प्रकृति भावी है और उसे कानून की दृष्टि से पूर्वप्रभावी नहीं माना जा सकता।
आंध्र प्रदेश के कृष्णा गोदावरी बेसिन से निकलने वाली गैस के बारे में आरआईएल और पेट्रोलियम मंत्रालय के बीच हुए संवाद का उल्लेख करते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी आरएनआरएल के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर को उनके मुवक्किल सहित सभी उपभोक्ताओं के लिए आधार कीमत के रूप में तय किया गया था।
आरआईएल द्वारा 14 अप्रैल 2006 को पेट्रोलियम मंत्रालय को लिखे पत्र का हवाला देते हुए रोहतगी ने कहा, "12 जनवरी 2006 को आरआईएल और आरएनआरएल ने गैस आपूर्ति के एक प्रमुख समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत आरएनआरएल बिजली उत्पादन के लिए प्रति दिन 2.8 करोड़ यूनिट गैस की खरीद कर सकती है।"
रोहतगी ने कहा, "उत्पादन बंटवारा समझौते के प्रावधानों के तहत हम आपसे उपरोक्त कीमत को मंजूर करने का अनुरोध करते हैं।"
प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन, न्यायाधीश बी. सुरदर्शन रेड्डी और न्यायाधीश पी. सथशिवम की खंडपीठ के समक्ष रोहतगी ने कहा, "एक बार जब उत्पादन बंटवारा समझौते का मूल्यांकन हो चुका है तो ऐसे में आरआईएल 2.34 डॉलर प्रति यूनिट से आरएनआरएल को गैस की बिक्री कर सकती है।"
रोहतगी ने एक चार पृष्ठों का शपथपत्र भी दाखिल किया जिसमें कहा गया है कि आरआईएल के साथ आपसी सहमति के आधार पर आरएनआरएल के पास उपरोक्त कीमत, मात्रा और अवधि तक गैस हासिल करने का पूरा हक है।
संसद में पेट्रोलियम मंत्रालय के एक बयान का हवाला देते हुए रोहतगी ने कहा कि सरकार को यह पता है कि आरआईएल ने नई खोज और लाइसेंस नीति के तहत आरएनआरएल को गैस बेचने का समझौता किया था। इस नीति के तहत ठेकेदार के पास गैस के विपरण का पूरा अधिकार रहता है।
पिछले आठ सप्ताह से सर्वोच्च न्यायालय में उद्योगपति मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली आरआईएल और आरएनआरएल के बीच गैस आपूर्ति विवाद पर सुनवाई हो रही है।
मंगलवार दोपहर बाद हुई संक्षिप्त सुनवाई के दौरान आरएनआरएल के वकील ने कहा कि मंत्रियों के विशेषाधिकार समूह द्वारा इस बारे में लिए गए फैसले से काफी पहले दोनों कंपनियों के बीच वास्तविक समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके थे।
रोहतगी ने कहा कि मंत्रिमंडलीय समूह के फैसले की प्रकृति भावी है और कई मौकों पर ऐसे फैसलों को कानूनी तौर पर पूर्वप्रभावी नहीं माना जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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