कोपेनहेगन गए दल में दरार, लौटेंगे श्याम सरन (लीड-1)
कोपेनहेगन, 8 दिसम्बर (आईएएनएस)। कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर हो रहे शिखर सम्मेलन (सात से 18 दिसंबर) में हिस्सा ले रहे भारतीय प्रतिनिधिमंडल में मंगलवार को स्पष्ट रूप से मतभेद दिखाई दिया। मतभेद इतना कि प्रतिनिधिमंडल के नेता श्याम सरन ने पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश के कोपेनहेगन पहुंचने के पहले ही वहां से नई दिल्ली वापसी का फैसला कर लिया है।
प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री के विशेष दूत सरन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ शिखर सम्मेलन के अंतिम दो दिनों के दौरान बातचीत के लिए वापस कोपेनहेगन लौटेंगे।
इस बीच पर्यावरण मंत्री रमेश भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
भारत से गए सरकारी दल में मतभेद ऐसे समय में उभरा है, जब रमेश ने पिछले सप्ताह संसद में घोषणा की कि भारत अपने कार्बन उत्सर्जन में 2005 के मुकाबले वर्ष 2020 तक 20-25 प्रतिशत तक की कटौती करेगा।
इसके बाद चंद्रशेखर दासगुप्ता जैसे वरिष्ठ वार्ताकारों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि भारत ने बहुत जल्दी अपनी मुट्ठी खोल दी है, लिहाजा अब बातचीत के लिए कुछ नहीं बचा है। हालांकि अन्य सदस्यों ने उन्हें भरोसा बंधाया है। दासगुप्ता का यह बयान रमेश द्वारा संसद में दिए गए बयान से ठीक विपरीत है। बयान में कहा गया है, "भारत की ओर से अभी तक हमेशा सबसे देरी से बयान दिए गए हैं, लिहाजा इस बार की जल्दबाजी से ऐसा प्रतीत होता है कि वह दबाव में है।"
दूसरी ओर शिखर सम्मेलन के आयोजक, यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) और विकसित देशों के वार्ताकारों ने रमेश के बयान का गर्मजोशी से स्वागत किया है। वार्ताकारों ने कहा है कि जी-77 के अन्य छोटे सदस्यों से ऐसा करने के लिए नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वे अब तक भारत को ही अपने नेता के रूप में देखते रहे हैं।
लेकिन, जी-77 का दृढ़ मत है कि विकासशील देशों को उत्सर्जन में कटौती के लिए कहने के पहले, विकसित देशों को हर हाल में ग्रीनहाउस गैसों में कटौती करनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में सूडान के राजदूत स्टानिसलास-काव-डी-एपिंग ने सोमवार को सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर यहां अपनी स्थिति फिर से स्पष्ट कर दी थी। फिलहाल जी-77 की अध्यक्षता सूडान के पास ही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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