कंपनियों से भावनात्मक रूप से जुड़े कर्मचारी गलत नहीं होने देते
'यूनीवर्सिटी ऑफ इलिनोइस' से जुड़े अभिजीत वडेरा का कहना है कि कर्मचारियों की भावनाओं की अनदेखी से छोटी चोरी, गबन और यौन दुराचार की घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।
प्रोफेसर रुथ वी. अगुइलेरा और पूर्व प्रोफेसर ब्रिआना काजा के साथ सह-अध्ययनकर्ता वडेरा का कहना है, "यदि आप कर्मचारी की भावना और व्यक्तिगत पहचान की अनदेखी करते हैं तो ऐसी स्थिति में लोगों को गलत गतिविधियों से रोकने के प्रति प्रोत्साहित करना बहुत मुश्किल है।"
विश्वविद्यालय के एक वक्तव्य के मुताबिक वडेरा ने इस अध्ययन के लिए एक सीमेंट निर्माण संयंत्र में कार्यरत 1,500 कर्मचारियों का साक्षात्कार किया।
अगुइलेरा का कहना है कि प्रशिक्षण सत्रों के जरिए कंपनी और कर्मचारियों के बीच संपर्क स्थापित किया गया और कर्मचारियों को गलत काम न करने व गलत काम होते देखने पर उसे रोकने के लिए प्रेरित किया गया।
उन्होंने कहा, "यदि मैं अपनी कंपनी से भावनात्मक रूप से जुड़ी हूं तो मैं इसे रोकूंगी और कुछ गलत देखने पर चेतावनी दूंगी। यदि मैं केवल तनख्वाह के लिए काम करूंगी तो मैं कंपनी में कुछ भी गलत देखने पर उसकी ओर ध्यान नहीं दूंगी।"
'बिजनेस इथिक्स क्वाटरली' में इस अध्ययन के परिणाम प्रकाशित किए गए हैं।
वडेरा ने 'इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस' (आईएसबी), हैदराबाद से प्रबंधन का कोर्स किया है और मुंबई विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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