हम दंतहीन नहीं हैं : मानवाधिकार आयोग (10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस )
नई दिल्ली, 8 दिसम्बर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के बारे में यह धारणा सही नहीं है कि यह 'दंतहीन' निकाय है। सच यह है कि प्रमुख मसलों पर इसकी 99 फीसदी सिफारिशें स्वीकार की जाती हैं। इसके सदस्य पी.सी शर्मा का यह कहना है।
शर्मा ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "आयोग सिफारिश करने वाला निकाय है। संसद ने इसे इसी रूप में गठित किया है। लेकिन इसके साथ ही इसे सिविल कोर्ट की ताकत भी हासिल है। हम मानवाधिकार का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को तलब कर सकते हैं, रिकार्ड मंगा सकते हैं और अदालती कार्यवाही को प्रभावित कर सकते हैं।" शर्मा ने 10 दिसंबर को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस से पहले इस संवाददाता से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि यह धारणा सही नहीं है कि आयोग असरदार संगठन नहीं है या इसे ताकत हासिल नहीं है। शर्मा केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक भी हैं। एक अहम मसला जिस पर आयोग की खास नजर है, वह है किशोर न्याय प्रणाली।
वह कहते हैं, "हमारे देश में किशोर न्याय प्रणाली अच्छी स्थित में नहीं है। हमने इस पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर लोगों एवं अधिकारियों को किशोरों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने की कोशिश। दुख की बात है कि ऐसे मसले पर कानून की भावना की कद्र नहीं की जाती।"
आयोग की प्राथमिकताओं के बारे में पूछे जाने पर शर्मा ने कहा, "मानसिक स्वास्थ्य, बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी, स्वास्थ्य, शिक्षा, जेलों एवं अस्पतालों की स्थिति आदि जैसे मसलों को हम उच्च प्राथमिकता देते हैं।" शर्मा ने बताया कि आयोग ने हाल में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को एक पत्र लिखा है जिसमें उससे मेडिकल छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर एक अनिवार्य विषय पढ़ाए जाने का आग्रह किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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