2014 तक पूरी हो जाएगी रोहतांग सुरंग

नई दिल्ली, 8 दिसम्बर (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर में लद्दाख तक पूरे साल आवाजाही सुनिश्चित करने वाली महत्वाकांक्षी रोहतांग सुरंग परियोजना का निर्माण कार्य अगले साल से शुरू हो जाएगा और इसे 2014 तक पूरा कर लिया जाएगा।

तीन दशक से भी पहले इस परियोजना की परिकल्पना की गई थी। घोड़े के नाल के आकार वाली नौ किलोमीटर लंबी इस सुरंग के बन जाने से लद्दाखी शहर लेह हिमाचल प्रदेश के मनाली से जुड़ जाएगा।

अधिकारियों ने आईएएनएस को बताया कि यह सुरंग 3,000 से 3,100 मीटर की ऊंचाई से होकर गुजरेगी और दुनिया की सर्वाधिक ऊंची सुरंगों में से एक होगी। सीमा सड़क संगठन(बीआरओ) के एक अधिकारी ने बताया, "यह सुरंग लद्दाख एवं सियाचिन ग्लेशियर स्थित अग्रिम सैन्य चौकियों तक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।"

उन्होंने बताया कि सुरक्षा पर गठित मंत्रिमंडलीय समिति ने इस साल 24 सितंबर को सुरंग के लिए ठेके को मंजूरी दी। यूं तो इसकी परिकल्पना 1983 में की गई थी, इसकी आधारशिला वर्षो बाद वर्ष 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी। इसके बाद अगला कदम उठाने में नौ साल लग गए।

सुरंग निर्माण का ठेका एफकॉन इंफ्रास्ट्रक्च र एवं यूरोपीय कंपनी स्ट्राबैग ने हासिल किया है। दोनों कंपनियां कारोबारी गठजोड़ कर चुकी हैं। अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, "इसके निर्माण का कार्य अगले साल से शुरू होगा और 2014 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा।" इस परियोजना पर करीब 1500 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

इंजीनियरों एवं कामगारों को इसे तैयार करते वक्त भारी बर्फबारी, तूफानी हवाओं एवं शून्य से भी कम तापमान वाले वातावरण का सामना करना होगा। इस सुरंग से जुड़ने वाली सड़कों का निर्माण जोर-शोर से चल रहा है। 3,978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रोहतांग दर्रे के नीचे से गुरजने वाली यह सुरंग चीन से सटे भारतीय इलाकों तक पूरे साल आवाजाही सुनिश्चित करेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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