पंजाब बंद का मिलाजुला असर (राउंडअप)
पूरे राज्य के अधिकांश शहरों में सोमवार को दुकानें बंद रहीं। अधिकांश शिक्षा संस्थान भी बंद रहे। जो संस्थान खुले रहे, उनमें उपस्थिति बहुत कम रही। राजमार्गो और शहरों में यातायात सामान्य रहा। अमृतसर-लुधियाना-अंबाला रेलमार्ग पर रेल सेवाएं अप्रभावी रहीं।
पूरे राज्य, खासकर लुधियाना में सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क रहे।
दमदमी टकसाल और संत समाज सहित सिख संगठनों ने सोमवार को पंजाब बंद का आह्वान किया था। लुधियाना में शुक्रवार और शनिवार की हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।
बंद के आह्वान और लुधियाना में कर्फ्यू के कारण पंजाब विश्वविद्यालय ने सोमवार को लुधियाना, होशियारपुर और चंडीगढ़ के केंद्रों पर परीक्षा स्थगित कर दी।
स्थानीय अधिकारियों ने लुधियाना में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय सहित अन्य सभी शिक्षण संस्थाओं को बंद करने का आदेश दिया था।
एक संयुक्त बयान में दमदमी टकसाल के प्रमुख हरनाम सिंह खालसा, आल इंडिया सिख स्टूडेंट फेडरेशन के अध्यक्ष करनैल सिंह पीर मोहम्मद और खालसा एक्शन कमेटी के प्रमुख मोहकम सिंह ने कहा कि वे बंद की सफलता से संतुष्ट हैं।
बयान में कहा गया है, "पंजाब में बंद 80 प्रतिशत सफल रहा। लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला, मोगा, फरीदकोट और भटिंडा जैसे अधिकांश बड़े शहर पूरी तरह बंद रहे। बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और इस दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।"
शनिवार को विवादित आध्यात्मिक नेता आशुतोष महाराज के प्रवचन में व्यवधान पैदा करने की कोशिश करने वाले सिख संगठनों ने कहा कि वे पंजाब में किसी निरंकुश आध्यात्मिक नेता को किसी आयोजन की अनुमति नहीं देंगे।
संगठनों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हरीश बेदी की गिरफ्तारी की भी मांग की। बेदी ने ही आशुतोष महाराज का कार्यक्रम आयोजित किया था।
लुधियाना में सोमवार को लगातार तीसरे दिन कर्फ्यू लागू रहा। शहर में सुरक्षा बलों की भारी उपस्थिति देखी गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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