जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन शुरू (राउंडअप)

कोपेनहेगन, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में सोमवार को चेतावनी और उम्मीदों के बीच शुरू हो गया। माना जा रहा है कि इस सम्मेलन में लिए जाने वाले निर्णय पृथ्वी के भविष्य को तय करेंगे।

एक शीर्ष विशेषज्ञ ने कहा कि यदि 192 देशों ने अपने मतभेदों को दूर कर तत्काल कार्रवाई नहीं की तो दुनिया में जलवायु परिवर्तन के कारण करोड़ों लोग शरणार्थी हो जाएंगे।

जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी समिति (आईपीसीसी) के प्रमुख राजेंद्र पचौरी ने कहा कि बहस का समय समाप्त हो चुका है और सात से 18 दिसंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन को कार्रवाई की ओर अग्रसर होना चाहिए।

डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन के बेला सेंटर में दो सप्ताह तक चलने वाले इस सम्मेलन में दुनिया के 15,000 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि, गैर सरकारी संगठन और मीडिया के लोग जमा हुए हैं।

विकसित और प्रमुख विकासशील देशों ने यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) को संधियों के मसौदे जमा किए हैं जो महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचारों के दो छोर हैं। वह यह कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में किसे कटौती करनी चाहिए, कब तक करनी चाहिए और कितनी करनी चाहिए।

तथाकथित बीएएसआईसी समूह के देशों, ब्राजील, भारत, दक्षिण अफ्रीका और चीन ने विकसित देशों के लिए वर्ष 2020 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 40 से 45 प्रतिशत की कटौती का प्रस्ताव किया है।

पचौरी ने कहा, "20वीं सदी में औसत वैश्विक तापमान में 0.74 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है।"

डेनमार्क के प्रधानमंत्री लोके रासमुसेन ने सम्मेलन में आए वार्ताकारों से आग्रह किया कि वे इस सम्मेलन के दौरान किसी मजबूत और महात्वाकांक्षी समझौते को मूर्त रूप प्रदान करें।

समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार रासमुसेन ने सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कहा, "यदि राजनीतिक इच्छा शक्ति हो तो मतभेदों को दूर किया जा सकता है। और मैं मानता हूं कि हमारे पास राजनीतिक इच्छा शक्ति है।"

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित दुनिया के 110 नेताओं के इस 12 दिवसीय शिखर सम्मेलन के अंतिम चरणों में हिस्सा लेने की संभावना है।

इस सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य ग्लोबल वार्मिग को रोकना और गरीब देशों को भारी सहायता के जरिए जलवायु परिवर्तन पर अंकुश लगाना है। यह उद्देश्य विकसित देशों के कार्बन उत्सर्जन में अगले दो दशकों के दौरान 1990 के स्तर के मुकाबले 25 से 40 प्रतिशत की कटौती कर हासिल किया जा सकता है।

सम्मेलन के शुरुआती दिन दुनिया के 45 देशों के 56 समाचार पत्रों में प्रकाशित एक लेख छाया रहा। इस लेख में दुनिया के नेताओं से निर्णायक कार्रवाई का आह्वान किया गया है।

लेख में कहा गया है, "बिना कार्रवाई के यह जलवायु परिवर्तन हमारे वातावरण को नष्ट कर देगा और इसके साथ ही हमारी समृद्धि और सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी।"

इस लेख को लंदन के समाचार पत्र 'द गार्जिनय' के एक दल ने समाचार पत्र से जुड़े 20 से भी अधिक संपादकों के साथ एक महीने से भी अधिक समय तक राय मशविरा करके तैयार किया है। इस लेख को प्रमुख अंग्रेजी, चीनी, अरबी, फ्रेंच और रूसी समाचार पत्रों ने प्रकाशित किया है। इन समाचार पत्रों में भारत का द हिंदू, फ्रांस का ली मोंडे, टोरंटो स्टार, बोत्सवाना गार्जियन, और द मियामी हेराल्ड शामिल हैं।

लेख में कहा गया है, "हम कोपेनहेगन में जुटे 192 देशों के प्रतिनिधियों से आह्वान करते हैं कि वे हतोत्साहित न हो, विवाद में न पड़े, एक दूसरे पर दोषारोपण न करें, बल्कि आधुनिक राजनीति की बड़ी विफलता के अवसर का लाभ उठाएं।"

टिप्पणीकारों ने लिखा है, "यदि इस तरह के भिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक उद्देश्यों के साथ हम इस मुद्दे पर सहमत हो सकते हैं, जिस पर हमें सहमत होना चाहिए तो निश्चितरूप से हमारे नेता भी वैसा कर सकते हैं।"

आयोजकों ने इस सम्मेलन को आज की तिथि में इसे धरती का सबसे बड़ा आयोजन करार दिया है।

उमड़ी भीड़ से आयोजकों की फजीहत :

कोपेनहेगन में सोमवार से शुरू हुए जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के लिए जमा हुए दुनिया के 192 देशों की सरकारों के 15,000 प्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों और मीडिया के लोगों की भीड़ से आयोजकों की अच्छी-खासी फजीहत हो गई।

यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसी) के 15वें शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर सभी प्रवेश द्वारों पर लंबी कतारें देखी गईं।

समस्या रविवार को अपराह्न् बेला सेंटर के प्रवेश द्वार पर किसी बम को लेकर नहीं थी, जहां सैकड़ों प्रतिनिधि सम्मेलन के अपना बैज पाने हेतु कतार में खड़े थे। समस्या खाली रखे एक बैग को लेकर हुई, जिससे सभी डर गए। हालांकि बाद में पता चला कि बैग खाली है, लेकिन शुरू में तो पूरे इलाके को खाली कराया गया, बम निरोधी दस्ते को बुलाया गया, तब तक सभी प्रतिनिधि ठंड में खड़े इंतजार करते रहे।

इस घटना के कारण हुए विलंब का असर रविवार शाम को और सोमवार को भी बना रहा, क्योंकि एक बैज हासिल करने में लगभग दो घंटे लग गए। परिणामस्वरूप कई सारे प्रतिनिधि उद्घाटन समारोह में हिस्सा नहीं ले पाए।

जिस समारोह में देशों और सरकारों के 110 प्रमुख हिस्सा लेने वाले हों, और ऐसे में जितनी सुरक्षा की जरूरत होती है, इस सम्मेलन में सुरक्षा उससे भी कहीं अधिक सख्त है।

यही नहीं डेनमार्क पुलिस के पास खबर है कि अराजकतावादियों का एक समूह शिखर सम्मेलन के पूर्व के दिनों में अपेक्षित प्रगति के अभाव से नाराज है और उसने शहर पर हमले की योजना बनाई है।

संयुक्त राष्ट्र ने किया उपायों का खुलासा :

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन के शीर्ष अधिकारी ने उन उपायों का खुालासा किया जिन पर कोपेनहेगन सम्मेलन के दौरान सरकारों के बीच सहमति तैयार होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के नेताओं ने त्वरित कार्रवाई के लिए ठोस प्रस्ताव रखे हैं।

सम्मेलन आरंभ होने से एक दिन पहले जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संधि प्रारूप (यूएनएफसीसीसी) के कार्यकारी सचिव यवो डी बोअर ने कहा, "अगले दो हफ्तों में सरकारें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ठोस और दीर्घकालिक उपायों की घोषणा करेंगी।"

ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नियंत्रित करने का आह्वान करने वाली यूएनएफसीसीसी पहली अंतर्राष्ट्रीय संधि है और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों पर सहयोग करने की आधार संस्था के रूप में काम करती है।

डी बोअर ने उस त्रिस्तरीय कार्यक्रम के बारे में बताया, जिस पर सम्मेलन के दौरान सरकारों को सहमत होना चाहिए। पहला-जलवायु परिवर्तन पर तुरंत तेज और प्रभावी कार्रवाई, दूसरा-उत्सर्जन में व्यापक कटौती और उत्सर्जन की सीमा तय करने सहित कमजोर देशों को सहायता की प्रतिबद्धता, तीसरा-सभी के लिए दीर्घकालीक कम उत्सर्जन वाली कार्यनीति।

डीबोअर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर पिछले 17 वर्षो की वार्ताओं के दौरान कभी इतने अधिक देशों ने ऐसा वादा नहीं किया। अब रोज ही देश उत्सर्जन में कटौती के नए लक्ष्यों की घोषणा कर रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन रोकने के संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के लिए जिम्मेदार डी बोअर ने कहा, "कोपेनहेगन एक मील का पत्थर होगा।"

डी. बोअर के अनुसार जलवायु परिवर्तन से निपटने में विकासशील देशों की मदद के लिए विकसित देशों को वर्ष 2012 तक 10 अरब डॉलर की रकम की उपलब्ध कराने के लिए प्रयास तेज करने की आवश्यकता है।

क्योटो प्रोटोकॉल के तहत तय उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों के नवीनीकरण और वर्ष 2012 के बाद वार्ता की रुपरेखा तय करने के लिए कोपेनहेगन में 192 देशों के 15,000 से अधिक प्रतिनिधि जुट रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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