भोपाल के लोगों के शरीर में घुल रहा है धीमा जहर
नई दिल्ली के अनुसंधान और आंदोलन संगठन एवं सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि संयंत्र से तीन किलोमीटर दूर तक के भू-जल में भारतीय मानक से 40 गुना अधिक तक कीटनाशक है। यह कीटनाशक लोगों के शरीर में धीमा जहर घोलने का काम कर रहे हैं।
सीएसई की निदेशक सुनीता नारायण और संयुक्त निदेशक चंद्र भूषण ने मंगलवार को सीएसई प्रयोगशाला के अध्ययन और निष्कर्षो का हवाला देते हुए बताया कि संयंत्र के भीतर और बाहर तीन किलोमीटर की दूरी तक से लिए गए भू-जल के नमूनों में जहरीले पदार्थ पाए गए हैं। इन नमूनों में पाए गए जहरीले पदार्थ के रसायन का चरित्र संयंत्र मे जमा कचरे के रसायनों के चरित्र से मेल खाता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाए गए रसायन क्लोरिनेटिड बेंजीन मिश्रणों और कीटनाशक का स्रोत यूसीआईएल के अतिरिक्त अन्य कोई नहीं हो सकता है।
सुनीता नारायण ने प्रयोगशाला अध्ययन और उसके निष्कर्षो के आधार पर बताया कि भोपाल में संयंत्र क्षेत्र भीषण विषाक्तता को जन्म दे रहा है और लगातार हो रहा सूक्ष्म संपर्क हमारे शरीर में जहर घोलने का काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि संयंत्र की जमीन में मौजूद रसायन भू-जल में घुल रहे हैं और यह जहर धीरे-धीरे यहां के निवासियों को अपना शिकार बना रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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