आप्रवासी कामगार श्रम आपूर्ति असंतुलन को दूर करते हैं : रवि

उन्होंने गोवा के ललित रिसॉर्ट में आव्रजन एवं विकास पर आयोजित आठवीं एशिया-यूरोप बैठक(असेम) में उद्घाटन भाषण देते हुए कहा, "भारत जैसे देशों के आप्रवासी कामगार दूसरे देशों में उस स्थित में श्रम आपूर्ति असंतुलन को दूर करते हैं जब स्थानीय स्तर पर श्रमिकों की किल्लत पैदा होती है। श्रमिकों की किल्लत की भरपाई आप्रवासी कामगारों की सेवा लेकर की जाती है।"

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण कई देशों ने संरक्षणवादी आव्रजन नीतियां अपनानी शुरू कर दी हैं। इससे संकट और गहराएगा। उन्होंने कहा, "कुछ देशों की सरकारें यह लोक लुभावन धारणा पैदा कर रही हैं कि आप्रवासन बुरा है और विदेशी कामगार बढ़ती घरेलू बेरोजगारी की वजह हैं। यह अच्छी धारणा नहीं है। ऐसे कामगार विदेशों में श्रम आपूर्ति प्रवाह को संतुलित बनाकर विकास को मजबूती प्रदान करते हैं।"

उन्होंने कहा कि संरक्षणवादी नीतियों के कारण श्रम आपूर्ति के रास्ते में बाधाएं पैदा होंगी। इससे विकास की गति बाधित होगी। रवि ने ऐसे कदमों को संकीर्ण बताया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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