बान की मून काबुल पहुँचे

Ban Ki Moon

अफ़ग़ानिस्तान में दूसरे दौर के चुनाव को लेकर छाए भ्रम के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने काबुल पहुँचकर अफ़ग़ान राजनेताओं से मुलाक़ात की है. बान की मून ने कहा है कि दूसरे दौर के चुनाव के होने या नहीं होने का फ़ैसला अफ़ग़ान सरकार और अफ़ग़ानिस्तान के स्वतंत्र चुनाव आयोग को करना है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का अफ़ग़ानिस्तान दौरा ऐसे समय हुआ है जब एक दिन पहले ही अफ़ग़ान राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति हामिद करज़ई के विरोधी अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने चुनाव से हटने की घोषणा कर दी है जिससे चुनाव को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है.

वैसे बान की मून के दौरे का अफ़ग़ान चुनाव से कोई संबंध नहीं था और दरअसल वह काबुल संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों को भरोसा दिलाने जा रहे थे क्योंकि पिछले सप्ताह वहाँ संयुक्त राष्ट्र कर्मचारियों के गेस्ट हाउस पर हमला हुआ था. इस हमले में संयुक्त राष्ट्र के पाँच कर्मचारी मारे गए थे. हमले की ज़िम्मेदारी तालेबान ने स्वीकार की थी.

मगर अफ़ग़ान राजनीति पर छाए अनिश्चय के माहौल को देखते हुए ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि बान की मून के एजेंडे में चुनाव को लेकर ज़ारी उलझन को दूर करना भी शामिल रहेगा.

धांधली का आरोप

इस बात को लेकर अभी भी संदेह है कि शनिवार को चुनाव हो पाएगा या नहीं. अफग़ानिस्तान का चुनाव आयोग इस मामले में कोई घोषणा जल्दी ही करेगा. बीबीसी के काबुल संवाददाता एंड्रयू नार्थ का कहना है कि पहले चरण के चुनाव में बड़े पैमाने पर हुए धांधली की ख़बर के बाद चुनाव की वैधता सुनिश्चित कराने के लिए दूसरे चरण में चुनाव करवाने की पहल की जा रही है.

लेकिन अब जब चुनाव परिणाम सबके सामने स्पष्ट है यूएन, अमरीका और ब्रिटेन चाहता है कि चुनाव करवाए बिना ही राष्ट्रपति करज़ई को विजयी घोषित कर दिया जाए.

अक्टूबर में जब दूसरे चरण के चुनाव की घोषणा हुई थी तब बान की मून ने इस क़दम का स्वागत किया था. पिछले महीने उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए कहा पहले चरण में हुए बड़े पैमाने की धांधली को 'कष्टपूर्ण' कहा था और आशा जताई थी कि 7 नवंबर हो होने वाले चुनाव में इसे दुहराया नहीं जाएगा.

मून ने कहा था कि चुनाव सही तरह से करवाए जाएँ इस सुनिश्चित करने के लिए यूएन 'सभी तरह की सुरक्षा और प्रशासन से संबंधित क़दम' उठाएगा. डॉक्टर अब्दुल्ला ने रविवार को बीबीसी से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने देश हि्त में ऐसा निर्णय लिया है. इससे पहले अब्दुल्ला ने कहा था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग उन्होंने की थी लेकिन वो मांग पूरी नहीं हुई है.

अब राष्ट्रपति पद की दौड़ में केवल हामिद करज़ई रह गए हैं. करज़ई का कहना था कि चुनाव आयोग इस मुद्दे पर फ़ैसला करेगा.

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