चीन में क्रांति की 60वीं वर्षगाँठ

China

चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के सत्ता संभालने की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर बड़े पैमाने पर समारोह आयोजित किए गए हैं. एस मौके पर व्यापक सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं और सशस्त्र बलों को बीजिंग में तैनात किया गया है. इन समारोहों के दौरान बीजिंग में एक सैनिक परेड भी निकाली जाएगी जिसमें चीन की अब तक न देखी गई मिसाइल तकनीक की एक झलक देखने को मिलेगी.

राजधानी बिजिंग में आयोजित इन भव्य समारोहों को देखने के लिए लगभग 30 हज़ार लोगों को आमंत्रित किया गया है. ग़ौरतलब है कि आम लोगों को सलाह दी गई है कि वो 'मुश्किलों से बचें' और इन आयोजनों को टेलिविज़न पर ही देखें. बीजिंग की सड़कें बंद कर दी गईं हैं, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ाने रोक दी गईं हैं और शहर की भूमिगत रेल सेवा स्थगित कर दी गई है. सैनिक परेड के रास्ते पर और चांगन एवेन्यू में बहुत सी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बंद रहेंगे.

चीन के सरकारी समाचारपत्र चाइना डेली में प्रकाशित एक नोटिस में कहा गया है - "पुलिस ने बीजिंग के नागरिकों को आदेश दिया है कि वो एक अक्तूबर को मुश्किलों से बचने कि लिए अपने घरों से बाहर न निकलें और जनता को सलाह दी जाती है कि वो इन समारोहों को टेलिविज़न पर ही देखें."

सैनिक परेड के आलावा तियानामन चौक में हज़ारों लोग और स्कूली बच्चे आकर्षक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे. ये समारोह चीन सरकार द्वारा आयोजित इस वर्ष का सबसे बड़ा समारोह होगा और इनके लिए सेना द्वारा पिछले मई माह से अभ्यास किया जा रहा था.

प्रसिद्ध तियानामन द्वार पर चीन की क्रांति के जनक माने जाने वाले माओ त्से तुंग का एक नया चित्र लगाया गया है. इसी द्वार पर खड़े होकर चीनी नेता परेड की सलामी लेंगे. इस अवसर पर आतिशबाजी का भी प्रदर्शन किया जाएगा. समझा जाता है कि बीजिंग ओलंपिक खेलों के दौरान जो आतिशबाज़ी की गई थी उससे लगभग दुगुनी आतिशबाज़ी की जाएगी.

बीबीसी के बीजिंग संवाददाता माइकल ब्रिस्टो का कहना है कि चीनी गणतंत्र अपने शुरुआती दिनों के मुक़ाबले में नाटकीय ढंग से बदला है लेकिन ये स्पष्ट नहीं है कि जिस देश पर कम्युनिस्ट पार्टी का शासन है वह क्या कम्युनिस्ट देश ही है. उनके अनुसार चीन के नेता तो कम्युनिस्ट सिद्धांतों पर चलने का दावा करते हैं लेकिन देश की अर्थव्यवस्था मारग्रेट थैचर की सोच से ज़्यादा मेल खाती है, कार्ल मार्क्स की सोच से कम.

माइकल ब्रिस्टो के अनुसार 'चीनी नेता डेंग शियोपेंग ने चीन की अर्थव्यवस्था को तीन दशक पहले उदारीकरण की ओर मोड़ा था, और चाहे अर्थव्यवस्था पर चीनी सरकार का अब भी ख़ासा नियंत्रण है और सरकारी योजना प्रक्रिया को पूरी तरह से त्याग नहीं दिया गया, लेकिन चीन को कम्युनिस्ट स्वर्ग भी नहीं कहा जा सकता है.'

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