चीन से लगी चौकियों को मजबूत कर रही सेना

अधिकारी का कहना है कि , "सीमा पर घुसपैठ से इसका कुछ भी लेना-देना नहीं है, क्योंकि सरकार ने घुसपैठ से आधिकारिक रूप से इंकार किया है।" अधिकारी ने कहा, "नियमित गतिविधियों के अलावा वहां किसी भी तरह की अन्य गतिविधियां नहीं चलाई जा रही हैं।" अधिकारी ने कहा, "वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगभग 50 फीसदी सैनिकों को अग्रिम चौकियों पर तैनात कर दिया गया है।" सैन्य अधिकारी इस अभियान को आधिकारिक तौर पर चीन के सैन्य अभ्यास के खिलाफ कार्रवाई मानने से इंकार कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब सड़कों का व्यापक नेटवर्क तैयार कर लिया है और ल्हासा से आगे रेल लाइन पहुंचाने की कोशिशों में लगा हुआ है। जबकि भारत ज्यादातर जगहों पर सीमा तक बड़े वाहन पहुंचाने की स्थिति में भी नहीं हैं। हालत यह है कि हम लेह तक 'ऑल वेदर (हर मौसम के लिए फिट) रोड" तक नहीं बना पाए हैं।
सेना के एक अधिकारी के मुताबिक सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) सड़कें बना तो रहा है, लेकिन अभी काफी काम बाकी है। उन्होंने बताया कि लद्दाख का देश के शेष हिस्सों से 12 महीने संपर्क बनाए रखने में समस्या आ रही है। लेह को शेष देश से दो सड़कें जोड़ती हैं। एक श्रीनगर से और दूसरी मनाली, हिमाचल प्रदेश से। लेकिन, दोनों ही रास्ते खतरनाक दर्रो के चलते सर्दियों में बंद हो जाते हैं। श्रीनगर के बाद जोजिला दर्रा है तो मनाली के बाद रोहतांग दर्रा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस












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