भारत करेगा आईएमएफ में निवेश

भारत का निवेश का यह संकल्प ब्रिक के चार देशों द्वारा किए जाने वाले 80 अरब डॉलर राशि के योगदान का एक हिस्सा है। इस कोष का मकसद उन देशों की मदद करना है जो ताजा वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। चीन इस मद में 50 अरब डॉलर का योगदान करेगा। बाकी राशि भारत, रूस और ब्राजील की ओर से प्रदान की जाएगी।
उल्लेखनीय है अप्रैल में लंदन में जी-20 की बैठक में यह फैसला किया गया था कि आईएमएफ में विभिन्न देशों की ओर से कुल 500 अरब डॉलर का योगदान किया जाएगा। उस बैठक में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह भी मौजूद थे। रकम का इस्तेमाल वित्तीय संकट में फंसे देशों, खासकर गरीब देशों की मदद के लिए किया जाना है।
यूरोप ने आईएमएफ में करीब 100 अरब डॉलर के योगदान का ऐलान किया था। जर्मनी और फ्रांस इस कोष में यूरोपीय योगदान को बढ़ाकर 175 अरब डॉलर किए जाने के पक्ष में हैं। जर्मनी और फ्रांस ने एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है, "भारत और सऊदी अरब जैसे अन्य देशों से यह उम्मीद की जा सकती है कि वे कोष में भारी योगदान करेंगे। हम इन देशों से कोष को समृद्ध बनाने के प्रयासों में शामिल होने की उम्मीद करते हैं।"
बयान में यह भी कहा गया है कि यूरोपीय देशों को दूसरे देशों के कदम का इंतजार किए बिना अपने योगदान की घोषणा करनी चाहिए। ब्रिटेन को जर्मनी एवं फ्रांस का संयुक्त प्रस्ताव पसंद नहीं है। उसका मानना है कि उसकी अर्थव्यवस्था अभी संकट से नहीं उबरी है, इसलिए योगदान में इजाफा व्यावहारिक कदम नहीं होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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