18 वर्ष बाद डूसू अध्यक्ष पद पर निर्दलीय का कब्जा (लीड-1)
मनोज चौधरी अध्यक्ष चुने गए हैं। वह बौद्ध अध्ययन विभाग के छात्र हैं। उन्होंने ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के बजिंदर सिंह को 11 मतों से हराया। चौधरी को 5,391 वोट मिले जबकि बजिंदर सिंह को 5,380 मत मिले।
इस बारे में विश्वविद्यालय के मुख्य पीठासीन अधिकारी जे. एम. खुराना ने कहा, "इस तरह का परिणाम सही मायने में एक लंबे समय के बाद आया है।"
इससे पहले 1991 राजीव गोस्वामी डूसू से अध्यक्ष बने थे। उन्होंने 1990 में पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के विरोध में आत्मदाह की कोशिश की थी।
उपाध्यक्ष पर एबीवीपी की कृति वढ़ेरा और सचिव पद पर एनएसयूआई की अर्शदीप कौर ने जीत दर्ज की। वढ़ेरा मिरांडा हाउस की और कौर विधि संकाय की छात्रा हैं।
हंसराज कॉलेज की छात्रा और निर्दलीय उम्मीदवार अनुप्रिया त्यागी संयुक्त सचिव चुनी गई हैं। डूसू चुनाव शुक्रवार को हुए थे। वोटों की गिनती उत्तरी दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके मे शनिवार सुबह शुरू हुई थी।
डुसू के चार पदों के लिए 29 उम्मीदवार मैदान में थे। इस बार चुनाव में कई छात्रनेताओं को उम्मीदवारी के लिए अयोग्य करार दिया गया था। पूर्व चुनाव आयुक्त जे.एम.लिंगदोह की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिशों के उल्लंघन के कारण कुछ छात्र नेताओं को अयोग्य ठहराया गया था।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को उन उम्मीदवारों की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपने को अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती दी थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अध्यक्ष पद के लिए एनएसयूआई के दीपक नेगी और एबीवीपी के रोहित चहल, उपाध्यक्ष पद के लिए एनएसयूआई के उमेश तोमर, सचिव पद के लिए एबीवीपी के ललित कुमार और संयुक्त सचिव पद के लिए अशोक खरे की याचिक खारिज कर दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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