हसीना ने तोहफे में भेजी मछली

हालांकि री-डू बायपास सर्जरी के बाद मांसाहार छोड़ चुके मनमोहन के लिए यह तोहफा कोई काम का नहीं है। लेकिन इस 'फिश डिप्लोमेसी" के जरिए बांग्लादेश ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भविष्य में भारत को इस मछली के निर्यात में कोई रुकावट नहीं आएगी।
बताया जाता है कि हिलसा से बनने वाले बंगाल के प्रिय व्यंजन को प्रधानमंत्री पिछले साल के अंत तक बड़े चाव से खाते रहे हैं। वे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के भोज में भी हिलसा मछली के व्यंजन का आनंद ले चुके हैं। लेकिन अब वह स्वास्थय के कारण ऐसा नहीं कर सकते। प्रधामनंत्री ने हसीना के इस तोहफे को प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के बीच बंटवा दिया।
गौरतलब है कि बांग्लादेश में सैन्य शासन के दौरान 2007 में हिलसा के भारत में निर्यात पर पाबंदी लगा दी गई थी। जून 2008 में इसे हटाया गया, लेकिन मछली का न्यूनतम निर्यात मूल्य इतना ज्यादा था कि भारत के कारोबारी नाराज हो गए और बांग्लादेश से इन मछलियों का व्यापार बंद कर दिया।












Click it and Unblock the Notifications