अमेरिका व ब्रिटेन का श्रीलंका में अस्थायी युद्ध विराम का आह्वान (लीड-3)

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन व ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड के बीच वाशिंगटन में बुधवार को आयोजित एक बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में उत्तरी श्रीलंका में गहराए मानवीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।

क्लिंटन व मिलिबैंड ने श्रीलंका सरकार व लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) से आह्वान किया कि युद्ध के बीच फंसे बेगुनाह नागरिकों की सुरक्षा के लिए वे कुछ समय के युद्ध विराम पर राजी हो जाएं।

अमेरिकी दूतावास से जारी एक बयान में कहा गया है कि दोनों नेता इस दीर्घकालिक विवाद के किसी राजनीतिक समाधान के अपने विचार पर दृढ़ हैं। बयान में कहा गया है कि अब राजनीतिक बातचीत शुरू करने का समय आ गया है।

उधर श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने बुधवार को लिट्टे के खिलाफ सैनिक संघर्ष में शीघ्र ही जीत की उम्मीद जताई।

गाले में 61 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति और सेना के सर्वोच्च कमांडर राजपक्षे ने कहा कि उन्हें कुछ ही दिनों में आतंकवादियों की निर्णायक हार का भरोसा है।

राजपक्षे का बयान ऐसे समय में आया है जब सरकारी सेना ने लिट्टे के मजबूत गढ़ों के अंदर घुसकर उसे पराजित कर दिया है और विद्रोहियों के खिलाफ करीब 95 प्रतिशत लड़ाई समाप्त मानी जा रही है। स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर कोलंबो और गाले में कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए।

इधर, श्रीलंका में तमिल नागरिकों की मौत के विरोध में तमिलनाडु में प्रदर्शन करने वाले 1100 लोगों को बुधवार को गिरफ्तार किया गया। पड़ोसी केंद्रशासित प्रदेश पुड्डचेरी में भी विरोध प्रदर्शन की वजह से जन-जीवन प्रभावित हुआ।

तमिलनाडु के अधिकारियों ने कहा कि पूरे राज्य में जनजीवन सामान्य रहा, जबकि विपक्षी नेताओं ने दिन भर की हड़ताल को सफल बताया।

स्थानीय लोगों के अनुसार चेन्नई में व्यापारिक प्रतिष्ठान, दुकानें और स्कूल आम तौर पर खुले रहे और यातायात सामान्य रहा।

राज्य के पुलिस महानिदेशक के. पी. जैन ने आईएएनएस को बताया कि पूरे राज्य से 500 से अधिक असामाजिक तत्वों को गिरफ्तार किया गया।

पुड्डचेरी में हड़ताल की वजह से सड़कें वीरान रहीं। तमिल नेता पी. नेदुमारन ने आईएएनएस से कहा, "पुड्डचेरी में सरकार के दबाव और पुलिस की चेतावनी के बावजूद हड़ताल पूरी तरह सफल रही।"

उन्होंने कहा कि अगर केंद्र और राज्य सरकारों ने तमिलों की भावनाओं की अनदेखी जारी रखी तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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