अफगानिस्तान में ईरान की भूमिका चाहते हैं नाटो प्रमुख
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक शेफर ने सोमवार को यहां आयोजित एक सुरक्षा संगोष्ठी में कहा, "मेरे विचार से हमें चर्चा करने की जरूरत है जिसमें सभी प्रासंगिक क्षेत्रीय ताकतें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, चीन, रूस और ईरान शामिल हों। हमें इस वास्तविक चुनौती से निपटने के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा कि एक से अधिक क्षेत्रीय दृष्टिकोण पर अवश्य आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा, "हमें अफगानिस्तान पर नजर टिकाना बंद करना होगा, क्योंकि वह एक टापू नहीं है। अफगानिस्तान की समस्याएं अकेले अफगानिस्तान द्वारा या अफगानिस्तान में नहीं सुलझाई जा सकतीं, क्योंकि वे अकेले अफगानिस्तान की समस्याएं नहीं हैं।"
डी हूप शेफर ने कहा कि तालिबान, अल कायदा व इस तरह की अन्य चरमपंथी ताकतों का एक क्षेत्रीय नेटवर्क है और साथ ही वहां एक अंतर्राष्ट्रीय नारकोटिक्स की समस्या भी है।
लेकिन शेफर ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें यह नहीं पता कि पश्चिम ईरान को कैसे इस मामले में शामिल करेगा।
उन्होंने कहा, "फिलहाल मैं सुनिश्चित नहीं हूं कि इसका क्या स्वरूप होगा।" लेकिन उन्होंने जोर दिया कि यह प्रस्ताव अपने आप में कुछ है।
ईरान, अफगानिस्तान का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है और सांस्कृतिक व आर्थिक रूप से अफगानिस्तान पर उसका खासा प्रभाव है। लेकिन ईरान, भारत व चीन जैसी क्षेत्रीय ताकतों को अफगानिस्तान मामले में उतना शामिल नहीं किया गया है।
उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों से या तो अधिक ताकत या फिर नागरिक सहयोग के साथ आगे आने को कहा। उन्होंने कहा, "राजनीतिक संतुलन के लिए और मिशन की सफलता के लिए यह सही मायने में एक टीम प्रयास होगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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