भाजपा ने आडवाणी के सुरक्षा संबंधी सुझावों पर अमल करने की मांग की
देश की सुरक्षा की मौजूदा स्थिति की समीक्षा के लिए आडवाणी ने शनिवार को देश के कुछ सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ एक बैठक की। बैठक में सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि सुरक्षा के मुद्दे पर कांग्रेसनीत केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार का रवैया नरम रहा है। मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने इस मामले में भी ढीलाढाला रवैया अपनाया और एक वैश्विक शक्ति की तरह कदम नहीं उठाए। बैठक में यह बात भी सामने आई कि सरकार के इसी रवैये के कारण ही मुंबई हमले के बाद देश को अपमानित महसूस करना पड़ा।
देश की सुरक्षा संबंधी खामियों को दुरुस्त करने के लिए पार्टी ने आडवाणी द्वारा सुझाए गई उन 350 उपायों को अमली जामा पहनाने की मांग की है जिसके तहत उन्होंने खुफिया विभाग, रक्षा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को दुरुस्त करने की बात कही थी।
पार्टी ने इसके अलावा रक्षा बजट बढ़ाने पर भी जोर दिया है ताकि सुरक्षा संबंधी आधुनिक उपकरणों का सेना में इस्तेमाल हो सके। साथ ही सैनिकों व पूर्व सैनिकों की सुविधाओं, वेतन व भत्तों में भी जरूरत के मुताबिक बढ़ाया जाना चाहिए।
इस बैठक में आडवाणी के अलावा भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, पार्टी महासचिव अरुण जेटली और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने भी शिरकत की। सुरक्षा विशेषज्ञों में पूर्व नौसेना प्रमुख ए. वाई टिपनीस, दिल्ली के पूर्व राज्यपाल विजय कपूर और पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक के. पी. एस. गिल समेत तीन दर्जन पूर्व पुलिस और सैन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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