नेताजी की 'धरोहर' भारत को सौंपना चाहते हैं तरलोक सिंह (चित्र सहित)

नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। जहां एक ओर पूरा राष्ट्र शुक्रवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 112वीं जयंती मनाने में मशगूल है, वहीं दूसरी ओर थाईलैंड में रह रहे उनके एक सहयोगी नेताजी की दो पिस्तौल भारत को सौंपने के लिए प्रयास में जुटे हुए हैं। उन्होंने इस काम के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करने हेतु अपने बेटे को दिल्ली भेजा है।

तरलोक सिंह चावला के अनुसार अगस्त 1945 में विमान दुर्घटना में मारे जाने की घोषणा के एक सप्ताह पूर्व नेताजी ने अपनी दो पिस्तौलें उन्हें रखने के लिए दी थीं।

तरलोक सिंह के बेटे संतोख सिंह चावला इन दिनों इन पिस्तौलों को सौंपे जाने की औपचारिकता पूरी करने के लिए दिल्ली आए हुए हैं।

तरलोक सिंह चावला इन पिस्तौलों को दिन-रात अपने सीने से लगा कर रखते हैं।

उन्होंने बताया कि नेताजी ने बैंकाक छोड़ने के पहले इन पिस्तौलों को उन्हें सौंपते हुए कहा था, "हम जल्द ही लाल किले में मिलेंगे।"

कोल्ट .32 व एफएन .635 श्रेणी की पिस्तौलें अभी तक चावला के पास रखी हुई हैं। चावला थाईलैंड में नेताजी के सचिव थे। चावला चाहते हैं कि जिस देश के लिए नेताजी ने लड़ाई लड़ी, उस देश को उनकी विरासत सौंप दी जाए।

चावला ने बैंकाक से आईएएनएस को फोन पर बताया, "उनकी इच्छा थी कि देश की आजादी के बाद लाल किले में मैं इन पिस्तौलों को उन्हें सौंप दूंगा। लेकिन आठ दिनों बाद ही ताईवान में एक विमान दुर्घटना में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। मुझे आज तक भरोसा नहीं होता कि उस दुर्घटना में उनकी मौत हुई होगी। मैं अभी भी उनका इंतजार कर रहा हूं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ सोचता हूं कि उनकी विरासत, उस देश को सौंप दी जाए, जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी।"

उनके सबसे छोटे बेटे संतोख सिंह चावला अपने पिता की इच्छा पूर्ति के लिए 20 जनवरी को दिल्ली पहुंचे।

थाईलैंड में इंडो-थाई फ्रेंडशिप एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोख सिंह ने कहा, "मैं एक मिशन पर यहां आया हूं। मेरे पिताजी का कत्र्तव्य तब पूरा होगा, जब दोनों पिस्तौलें नेताजी के देश में सम्मानजनक तरीके से वापस आ जाएंगी।"

वर्ष 1970 के दशक में थाईलैंड की यात्रा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चावला से उन पिस्तौलों को दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय को सौंपने के लिए कहा था।

संतोख सिंह कहते हैं, "लेकिन पिताजी उस समय राजी नहीं हुए। वह पिस्तौलों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े हुए थे। आज भी वह सोचते हैं कि नेताजी जरूर वापस आएंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+