बुनियादी तालीम और परवरिश से महरूम हैं करोड़ों बच्चे : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। देश में छह वर्ष की उम्र तक के लगभग 3.2 करोड़ बच्चे बुनियादी तालीम और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं।
स्वयंसेवी संगठन 'हक: सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स' की रिपोर्ट 'स्टेटस ऑफ चिल्ड्रेन इन इंडिया- 2008' में यह बात कही गई है। संस्था की सह-निदेशक इनाक्षी गांगुली का कहना है, "इस बदहाली का सबसे अधिक असर समाज के निचले तबके के बच्चों पर पड़ा है।"
रिपोर्ट के मुताबिक, "इनमें लंबे समय से बीमार बच्चों के अलावा, महिला कैदियों व यौनकर्मियों की संतानें, आतंकवाद, दंगे व आपदा के शिकार बच्चे तथा बेघर हुए बच्चे शामिल हैं। इनको बुनियादी शिक्षा नहीं मिल पा रही है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के सिर्फ 13 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के अंतर्गत आते हैं और उन्हें ही इस योजना का लाभ मिल पा रहा है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के सिर्फ 10 प्रतिशत बच्चे ही इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक देश में 16.4 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जो 0-6 वर्ष की उम्र के हैं जबकि छह करोड़ बच्चों की उम्र तीन से छह वर्ष के बीच है। इनमें से करीब 60 लाख बच्चे झुग्गी बस्तियों में रहते हैं और उन तक बुनियादी सुविधाएं बमुश्किल पहुंच पाती हैं।
इस रिपोर्ट के अनुसार, "देश में तीन से छह वर्ष तक के 3.4 करोड़ बच्चों को ही आईसीडीएस या निजी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। 2.6 करोड़ बच्चे तो हर योजना से उपेक्षित हैं और ये गांव और शहर दोनों में हैं।"
इनाक्षी ने कहा, "व्यापक नीतिगत परिवर्तन और पोषण संबंधी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के बिना देश के 2015 तक निर्धारित सहस्राब्दी विकास लक्ष्य तक पहुंच पाने की संभावना नहीं है। "
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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