कल्याण ने भाजपा छोड़ी, कहा गर्त में जाएगी पार्टी (लीड-2)

लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कल्याण सिंह ने कहा, "जीवन में कभी भी मैंने अपने आत्मसम्मान और स्वाभिमान से समझ्झौता नहीं किया। पिछले काफी समय से भाजपा में मेरी अपमानजनक उपेक्षा होती आ रही थी, इसलिए मैं भाजपा से जीवनभर के लिए नाता तोड़ रहा हूं और पार्टी के सभी पदों एवं प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहा हूं।"

कल्याण ने खुलकर भाजपा को कोसा। उन्होंने कहा कि भाजपा का अब कोई भविष्य नहीं है। वह गर्त में जाएगी। उन्होंने बताया, "भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह को मैंने अपना इस्तीफा फैक्स के माध्यम से भेज दिया है।"

उन्होंने कहा, "जब मैंने प्रदेश भाजपा की कमान संभाली थी तो उत्तरप्रदेश में पार्टी के केवल आठ सांसद थे। दिन रात मेहनत करके मैंने भाजपा को वह दिन दिखाया जब उसके अकेले इस प्रदेश से 60 सांसद चुने गए।"

सिंह ने दावा किया कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा उत्तरप्रदेश में 5 से 6 सीटों के बीच सिमट कर रह जाएगी। पार्टी को अपने कर्मो का फल भोगना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि शहर के लोगों की पार्टी के रूप में जाने जानी वाली भाजपा को उन्होंने गरीब, पिछड़ों और किसानों की पार्टी बनाया, लेकिन इसके बदले उन्हें नेतृत्व से तिरस्कार और उपेक्षा मिली।

भाजपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कल्याण ने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए राज्य की 80 सीटों के उम्मीदवारों की सूची तैयार कर ली गई, लेकिन उनसे किसी ने एक बार भी सलाह लेना उचित नहीं समझा।

कल्याण ने कहा नेतृत्व द्वारा लगातार की जा रही अवहेलना के बावजूद उन्होंने 80 सीटों में से सिर्फ एक सीट बुलंदशहर पर अशोक प्रधान को टिकट देने पर ऐतराज जताया था, लेकिन भाजपा नेतृत्व के लिए अशोक प्रधान ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में डिबाई सीट से भाजपा उम्मीदवार राजवीर सिंह को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

उन्होंने कहा, "अशोक प्रधान को टिकट देने की घोषणा के बाद मैंने लालकृष्ण आडवाणी से फोन पर बात की थी। मैंने उनसे तीन बार कहा कि प्रधान को टिकट दिए जाने के फैसले से मैं सहमत नहीं हूं। मैंने यह भी साफ कर दिया था कि अशोक प्रधान को जनता वोट नहीं देगी इसलिए मुझे दोष मत देना।"

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा द्वारा अपने को एटा निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किए जाने के लिए कल्याण सिंह ने नेतृत्व को धन्यवाद देते हुए कहा कि वह भाजपा के इस टिकट को लौटा रहे हैं।

गत दिनों समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से मुलाकात होने की खबरों के बाद अपने सपा में शामिल होने की अटकलों को विराम देते हुए कल्याण सिंह ने साफ किया वह न तो किसी पार्टी में शामिल होंगे और न ही कोई नई पार्टी बनाएंगे। हालांकि उन्होंने सक्रिय राजनीति से सन्यास न लेने की बात भी कही।

ज्ञात हो कि कल्याण सिंह ने इससे पूर्व भाजपा से बगावत करके राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई थी, लेकिन कुछ समय बाद वह फिर भाजपा में लौट आए थे। कल्याण सिंह ने भाजपा में वापस लौटने के फैसले को भारी भूल बताया।

इंडो-एशयिन न्यूज सर्विस।

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