कलाकारों का अपनी कृतियों पर स्वत्वाधिकार होना चाहिए : रजा
नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय समकालीन कला के विशेषज्ञ सईद हैदर रजा, राजधानी की एक सबसे पुरानी कला दीर्घा में लगाई गई खुद के चित्रों की एक प्रदर्शनी में अपनी शुरुआती कृतियों की नकली प्रतियां देख कर दंग रह गए।
वह कहते हैं कि इस तरह के मामलों पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक कलाकार का अपनी कृतियों पर स्वत्वाधिकार होना चाहिए। इस मामले को लेकर उन्होंने एक मुकदमा भी किया है।
एक साक्षात्कार के दौरान रजा ने आईएएनएस को बताया, "फर्जी पेंटिंग्स बनाना बहुत दुखद है। अपने-अपने क्षेत्रों में काम कर रहे किसी लेखक, चित्रकार व अनुसंधानकर्ता के लिए उसके जीवन की कुछ खास चीजें महत्वपूर्ण होती हैं।"
उन्होंने कहा, "सभी कलाकारों का अपनी कृतियों पर स्वत्वाधिकार होना चाहिए। मैंने आरोपी के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया है।"
रजा द्वारा कई फर्जी चित्रों की पहचान किए जाने के बाद उनके चित्रों की प्रदर्शनी उस कला दीर्घा से हटा ली गई।
रजा मानते हैं कि उनकी कृतियों की नकल करने वाला बेशक प्रतिभावान कलाकार है, लेकिन वह अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल गलत दिशा में कर रहा है।
इस घटना के बाद भी वे अपने कामों में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा, "26 नवंबर के मुंबई हमले से प्रेरित होकर शांति के विषय पर मैं कुछ पेंटिंग्स बना रहा हूं।"
रजा ने कहा कि मैं फ्रांस में 58 वर्षो तक रहा, लेकिन वहां इस तरह की घटना कभी सामने नहीं आई।
एक कलाकार के रूप में अपनी विकास यात्रा के बारे में रजा ने कहा, "30 वर्षो तक फ्रांस में मैंने पेंटिंग के बारे में शोध किया। यूरोपीय पृष्ठभूमि, खासतौर से फ्रांस में स्थित भू-दृश्यों पर पेंटिंग बनाना मुझे बहुत प्रिय है। लेकिन उसके बाद मैंने महसूस किया कि मेरे कार्य में कुछ महत्व की चीजें छूट रही थीं। उसके बाद मैं भारत आ गया।"
उन्होंने आगे बताया, "यहां आकर मैंने बिंदु, कुंडलिनी, पुष्प प्रतीक के सिद्धांतों तथा कला की ज्यामिती का अध्ययन किया।"
रजा फिलहाल वर्ष 2009 के जून-जुलाई महीने में आयोजित होने वाले वेनिस बिएन्नेली के लिए 15 पेंटिंग्स का एक कलेक्शन तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा मुंबई हमले से प्रेरित होकर शांति के विषय पर कुछ चित्र बनाने में जुटे हुए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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