मध्यप्रदेश का विद्युत संकट केन्द्र सरकार की देन: शिवराज
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रकृति के रूठ जाने से इन्दिरा सागर, ओंकारेश्वर और सरदार सरोवर में पर्याप्त पानी न होने के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है, वहीं सारणी और बिरसिंहपुर पाली परियोजना में कोयले की कमी के कारण उत्पादन कम हो पा रहा है। केन्द्र की नीति प्रदेश के लिए घातक बन गई है।
मुख्यमंत्री ने भाजपा के दोबारा सत्ता में आने पर कहा कि यह पहला मौका है जब प्रदेश में गैर कांग्रेसी दल दोबारा सत्ता में आया है और उसे यह जनादेश विकास और जनकल्याण के लिए किए गए कायरें के आधार पर मिला है। अभी तक यह माना जाता रहा है कि चुनाव प्रबन्धन और जोड़-तोड़ के आधार पर जीते जा सकते हैं, परन्तु मध्यप्रदेश के जनादेश ने देश की राजनीति को नई दिशा दी है।
प्रदेश में औद्योगिक विकास के नाम पर किसानों और गरीबों को उजाड़े जाने के विपक्ष के आरोप पर चौहान ने भरोसा दिलाया है कि केन्द्र की पुनर्वास नीति का प्रदेश सरकार अक्षरश: पालन करेगी। गरीबों और किसानों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
चौहान ने स्वर्णिम मध्यप्रदेश के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने इसके लिए सात सूत्र तय किए हैं और इसके लिए कार्यदल भी बना दिए गए हैं। वे विपक्ष से अपेक्षा करते हैं कि वह सकारात्मक भूमिका निभाएगा। जहां सरकार की गलतियां और खामियां होंगी उसे वह कटघरे में खड़ा करने में भी नहीं हिचकेगा, लेकिन विपक्ष को विकास कार्यो में सरकार का साथ देना चाहिए।
इससे पहले नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी ने अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए प्रदेश की बिजली और लचर कानून व्यवस्था का जिक्र किया और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उनका आरोप था कि सरकार सिर्फ बातें करती है, काम नहीं।
बहस के दौरान अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी को कई बार विधायकों को टोका-टोकी न करने की हिदायत देना पड़ी और कई को तो उन्होंने फटकार भी लगाई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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