एक चर्चित अधिकारी का निधन

चिकित्सा की शिक्षा के बाद आईएएस बने गौतम गोस्वामी बिहार के देहरी ऑनसोन के रहने वाले थे और पिछले कुछ दिनों से गंभीर रुप से बीमार होने के कारण गहन चिकित्सा कक्ष में रखे गए थे.
1991 बैच के आईएएस अधिकारी गोस्वामी 43 वर्ष के थे और उन्हें पैनक्रियास का कैंसर था.
उनके परिवार में उनकी डॉक्टर पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं.
गौतम गोस्वामी पहली बार तब सुर्खियों में आए थे जब पटना के ज़िलाधीश की तरह वर्ष 2004 में आई बाढ़ से निपटने की उनकी कार्यकुशलता के लिए उनका नाम अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'टाइम' ने एशियन हीरो की तरह शामिल किया था.
उसके बाद ने चर्चा में तब आए जब इसी बाढ़ के दौरान हुए बाढ़ राहत कार्य में घोटाले की ख़बरें आईं और इस घोटाले में उन्हें शामिल माना गया.
बिहार सरकार ने बाढ़ राहत कार्य के लिए 18 करोड़ की राशि दी थी जो बिहार स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज़ (बीएसएसआई) के नाम से जमा होनी थी लेकिन इसे बिहार सत्य साईं इंडस्ट्रीज़ के खाते में जमा कर दिया गया जिसका छोटा नाम भी संयोग से बीएसएसआई ही है.
इस राशि में से 11 करोड़ का हिसाब नहीं मिल रहा था.
इस घोटाले को लेकर गौतम गोस्वामी और बिहार सत्य साईं इंडस्ट्रीज़ के संचालक संतोष झा सहित 20 लोगों पर आरोप लगाए गए थे.
जब यह घोटाला उजागर हुआ तब गौतम गोस्वामी प्रतिनियुक्ति पर सहारा ग्रुप में उच्चाधिकारी बनकर चले गए थे. लेकिन उन्हें वहाँ से बर्खास्त कर दिया गया था. बाद में उन्हें बिहार सरकार ने भी बर्खास्त कर दिया गया था.
उन्हें काफ़ी समय जेल में बिताना पड़ा और बताया जाता है कि तभी उनकी तबियत बिगड़ गई थी.
हालांकि बिहार सरकार ने उनको बाद में बहाल कर दिया गया था लेकिन बीमारी की वजह से उनकी पदस्थापना नहीं हो सकी थी.












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