'कम सक्रिय होती हैं महिलाएं'

शोधार्थियों ने स्कूली बच्चों और 70 की उम्र से ऊपर के लोगों का सक्रियता का स्तर परखा और दोनों ही मामलों में पुरुषों को ज़्यादा सक्रिय पाया.
इन अध्ययनों को 'यूके सोसायटी फॉर बिहेविरल मेडिसिन' के वार्षिक सम्मेलन में पेश किया गया.
लिवरपूल जॉन मूर्स विश्वविद्यालय ने पाया कि लड़कियाँ मेहनत वाले खेलों में लड़कों की तुलना में छह फ़ीसदी कम हिस्सा लेती हैं.
स्कूल के खेल के मैदान में दस से 11 साल के बच्चों के खेलों पर ध्यान देने वाले शोधार्थियों ने पाया कि लड़के और लड़कियाँ अलग अलग तरह से खेलते हैं.
चिंताजनक
लड़कियाँ आमतौर पर छोटे गुटों में ज़्यादा समय व्यतीत करने, बोलने, बात करने और सामाजिक व्यवहार वाले खेल खेलती देखी गईं.
जबकि ज़्यादातर लड़के बड़े गुटों में खेलते पाए गए और ऐसे खेल खेलते देखे गए जिनमें शारीरिक सक्रियता ज़्यादा थी जैसे फुटबॉल इत्यादि.
महिलाओं में सक्रियता कम होती है और वे घर के अंदर ही रहकर रोज़मर्रा के काम करती रहती हैं डॉ केन फ़ॉक्स
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शोधार्थी डॉ निकी रिजर्स ने कहा, "यह चिंताजनक है कि लड़कियों का सक्रियता स्तर लड़कों से कम है और हालांकि यह तस्वीर का एक छोटा हिस्सा है, फिर भी इससे लड़कियों का वज़न ज़्यादा हो सकता है और वो मोटापे का शिकार हो सकती हैं."
उन्होंने कहा, "स्कूलों को इस पर ध्यान देना चाहिए कि स्कूल के मैदान पर लड़कियों और लड़कों का व्यवहार अलग होता है और लड़कियाँ छोटे गुट वाले खेलों को पसंद करती हैं."
उनके अनुसार इसके बाद स्कूल खेल के समय मैदान पर ऐसे उपाय कर सकेंगे जिससे लड़कियाँ भी कठोर और मेहनत वाले खेलों में हिस्सा लेने के लिए उत्साहित हों.
बुज़ुर्ग महिलाएं
ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के नेतृत्व में हुए दूसरे अध्ययन में भी दोनों लिंगों में भेद देखा गया जिसमें 70 से ज़्यादा उम्र के लोगों पर ध्यान दिया गया था.
इसमें 70 से ज़्यादा उम्र के ज़्यादातर लोगों का सक्रियता स्तर बहुत कम पाया गया जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों ही थे.
इस अध्ययन में हिस्सा लेने वाले 70 फ़ीसदी लोग एक दिन में पाँच हज़ार कदमों से भी कम चल पाते थे.
लेकिन महिलाएं तो पुरुषों से भी कम सक्रिय पाई गईं.
शोधार्थी प्रोफ़ेसर केन फ़ॉक्स ने कहा, "पुरुष महिलाओं के मुक़ाबले शारीरिक रूप से ज़्यादा सक्रिय रहे और यह घर से बाहर निकलने से ही समझा जा सकता है."
उन्होंने कहा, "हालांकि इसके भी सबूत मिले कि वे दिन में लंबे समय तक बैठे रहते हैं."
फ़ॉक्स ने कहा, "महिलाओं में सक्रियता कम होती है और वे घर के अंदर ही रहकर रोज़मर्रा के काम करती रहती हैं."
ब्रिटेन के लोकस्वास्थ्य से जुड़ी संस्था के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर एलन टेलर ने कहा है कि दोनों ही अध्ययनों के नतीजे महत्वपूर्ण हैं.
उनका कहना था, "शारीरिक सक्रियता हड्डियों और जोड़ों को मज़बूत बनाती हैं. मैं लड़कियों को लेकर चिंतित हूँ जो शारीरिक सक्रियता में कमी की वजह से बाद में हड्डियों के कमज़ोर होने की बीमारी हो सकती है."












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