प्रधानमंत्री ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए राष्ट्रवाद की भावना पर जोर दिया

प्रधानमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान के युद्धोन्माद भड़काने के बावजूद भारत अडिग रहा और उसकी एकता बरकरार रही।

उन्होंने कहा, "परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं और वे चुनौतीपूर्ण हैं भी लेकिन हमारे नियंत्रण से बाहर नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि बाहरी और आंतरिक खतरों का सामना करने के लिए राष्ट्रवाद की सशक्त भावना का पैदा होना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री ने कहा,"दुर्भाग्यवश हम अपने पड़ोसियों का चयन नहीं कर सकते।"

उन्होंने कहा कि मुंबई के आतंकवादी हमलों को स्पष्ट रूप से पाकिस्तान से गतिविधियां चलाने वाले आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया था और आतंकवादियों ने जिस तरह इस हमले को अंजाम दिया उससे पता चलता है कि इसे पाकिस्तानी सरकार का समर्थन हासिल था।

उन्होंने कहा कि साल भर से सुरक्षा के हालात ज्यादा जटिल हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि मुंबई में हुए हमले सुरक्षा खामियों का नतीजा थे। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला करने के लिए समुद्री मार्ग का प्रयोग किया और हमारी पैनी नजरों से बच निकले।

उन्होंने माना कि बांग्लादेश और नेपाल से जुड़ी सीमा से भी घुसपैठ हो रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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