आतंकवाद की व्याख्या सिर्फ सैन्य संदर्भो में ही नहीं हो : प्रधानमंत्री (लीड-2)
प्रधानमंत्री ने मुंबई में 26 नवंबर को हुए आतंकवादी हमलों के लिए पहली मर्तबा सीधे तौर पर पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते हुए वहां की सरकार को 'कमजोर' और 'गैर-जिम्मेदार' करार दिया है।
मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "आतंकवाद को अंजाम देने वालों का मकसद देश के कई विकास क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाना होता है। ऐसी में आतंकवाद की व्याख्या सिर्फ सैन्य परिप्रेक्ष्य में ही नहीं की जानी चाहिए।"
उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए खुफिया तंत्र को पूरी तरह दुरुस्त करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, "जो देश आतंकवाद का इस्तेमाल अपनी विदेश नीति के हथियार के तौर पर कर रहे हैं उन्हें विश्व बिरादरी के बीच अलग-थलग किए जाने की जरूरत है। हमें यह साबित करना होगा कि हमारे देश जैसा सजग बहुलवादी एवं धर्मनिरपेक्ष समाज ही आतंकवाद के खिलाफ पुख्ता रक्षात्मक कवच हो सकता है।"
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ अपनी सरकारी नीति के तौर पर आतंकवाद को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारे कुछ पड़ोसी मुल्कों की सरकारें काफी कमजोर हैं। सरकार जितनी ही कमजोर होगी, उसका रवैया उतना ही गैर-जिम्मेदार होगा। आतंकवाद से जुड़ी हमारी कई जांच रिपोर्टो पर पाकिस्तान का गैर-जिम्मेदार रवैया इसका सटीक उदाहरण है।"
यह पहल मौका है जब प्रधानमंत्री ने मुंबई की घटना के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से भारत विरोधी तत्वों की पनाहगाह बना हुआ है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, "भारत में आतंकवाद पाकिस्तान प्रायोजित है। आतंकवाद पाकिस्तान की भारत संबधी नीति का हिस्सा बन चुका है। वह लंबे समय से इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हथियार के तौर पर करता रहा है।" उन्होंने भारत की 7500 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा पर गहन निगरानी रखे जाने की जरूरत पर बल दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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