लिट्टे के राजनीतिक गढ़ किलिनोच्चि पर सेना का कब्जा (लीड-3)
कोलंबो, 2 जनवरी (आईएएनएस)। श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने शुक्रवार को ऐलान किया कि लिबरेशन टाइगर्स आफ तमिल ईलम (लिट्टे) के राजनीतिक गढ़ किलिनोच्चि पर अब पूरी तरह सेना का कब्जा हो गया है।
राजपक्षे के इस ऐलान के साथ ही समूचे श्रीलंका में जश्न का माहौल व्याप्त हो गया। राजधानी कोलंबो में लोग सड़कों पर उतर गए और आतिशबाजी शुरू कर दी।
देश के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि 13 वर्ष पहले जाफना प्रायद्वीप में लिट्टे को मिली करारी हार के बाद यह तमिल विद्रोहियों की सबसे बड़ी पराजय है। यह पूरे श्रीलंका के लिए बेहद अहम उपलब्धि है।
राजपक्षे ने कहा, "यह सिर्फ लिट्टे के खिलाफ जीत नहीं है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ चल रही अंतर्राष्ट्रीय लड़ाई की भी विजय है। आज पूरी दुनिया हमारी सेना द्वारा आतंकवाद के खिलाफ चलाए अभियान की प्रशंसा कर रही है।"
उन्होंने सेना की सराहना करते हुए कहा कि अब लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन और सभी तमिल विद्रोहियों को सशस्त्र आत्मसमर्पण कर देना चाहिए।
सेना को मिली इस कामयाबी के बारे में रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इस जीत के बाद सरकार को तमिल विद्रोहियों पर सैन्य और मनोवैज्ञानिक रूप से निर्णायक बढ़त मिल गई है।
उधर, श्रीलंकाई सरकार के इस दावे पर लिट्टे की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सेना और लिट्टे के संघर्ष में वर्ष 2005 से अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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