देश में दलितों के उत्पीड़न में उत्तरप्रदेश सबसे आगे
केंद्र सरकार के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी वर्ष '2007 के अपराध' नामक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वर्ष 2007 में देश में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न के कुल 9,819 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 2,113 मामले अकेले उत्तरप्रदेश से हैं। ये मामले अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न निरोधक अधिनियम 1989 के तहत दर्ज किए गए हैं।
दलित उत्पीड़न के मुकाबले के लिए अस्तित्व में आई बहुजन समाज पार्टी वर्ष 2007 में उत्तरप्रदेश में सत्ता में आई। रिपोर्ट के अनुसार बहुजन समाज पार्टी के सत्ता में आने के बाद भी प्रदेश में दलित उत्पीड़न के मामलों में कोई गिरावट नहीं देखी गई।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2006 में देश में दलित उत्पीड़न के कुल 8,581 मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2005 में यह आंकड़ा 8,497 का था।
रिपोर्ट में कहा गया है, "देश में वर्ष 2007 में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न के मामलों में पूर्व के वर्ष की तुलना में 14.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जबकि उत्तरप्रदेश में ऐसे मामलों में वृद्धि का प्रतिशत 21.5 था।"
एनसीआरबी की रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री शकील अहमद ने आईएएनएस से कहा, "उत्तरप्रदेश में राजनीतिक पार्टियों द्वारा दलितों का इस्तेमाल वोट के लिए किया जा रहा है। राज्य सरकार के पास समाज के कमजोर वर्गो के कल्याण के लिए कोई एजेंडा ही नहीं है। वास्तविकता यह है कि समाज के हर वर्ग की मुश्किलें बढ़ी हैं।"
अहमद ने कहा, "सरकार मे शामिल लोग खुद अपराध में शामिल हैं। हाल में बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक का एक अभियंता की हत्या करवाना, इसका एक जीता जागता उदाहरण है।"
नेशनल दलित फोरम (एनडीएफ) के नेता उदितराज का कहना है, "दलितों की हिफाजत के लिए अमल में लाए गए तमाम उपायों के बावजूद उनके उत्पीड़न के मामलों में कमी नहीं आई है। आश्चर्य कि दलित उत्पीड़न के सबसे ज्यादा मामले उत्तरप्रदेश में सामने आए हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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