सिंहावलोकन नेपाल 2008: राजशाही का पटाक्षेप, लेकिन राजनीतिक उठा-पटक जारी
काठमांडू, 25 दिसम्बर (आईएएनएस)। नेपाल में इस वर्ष अप्रैल में माओवादियों के लंबे संघर्ष के बाद राजशाही का खात्मा हुआ और देश गणतंत्र की राह पर चल पड़ा लेकिन उसे अब भी कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
नेपाल में 239 वर्ष पुरानी राजशाही को सामप्त करने के लिए माओवादियों को दस वर्षो तक संघर्ष करना पड़ा। चुनाव में माओवादियों की जीत के बाद पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र को महल तक छोड़ना पड़ा।
ज्ञानेन्द्र जून में शाही महल छोड़ साधारण नेपाली बन गए। माओवादी प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड देश के पहले माओवादी प्रधानमंत्री बने लेकिन उनकी राह आसान नहीं है।
सरकार के गठन के चार महीने के अंदर ही गठबंधन में दरार पड़ने लगीं। गठबंधन के दो प्रमुख घटक नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी -एकीकृत माओवादी लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) और मधेशी जनाधिकार फोरम ने गठबंधन से बाहर होने की धमकी दे दी।
नेपाल में राष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर भी राजनीतिक उठा पटक देखने को मिली। पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के नाम पर सहमति नहीं बन सकी।
पूर्व माओवादी विद्रोहियों के नेपाली सेना में विलय को लेकर अभी भी संशय की स्थिति बनी हुई है। पड़ोसी देशों भारत और चीन के साथ संबंधों को लेकर भी प्रचंड को विवादों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रचंड को पार्टी के अंदर ही कट्टरपंथियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार भविष्य में पार्टी टूट भी सकती है। तराई क्षेत्र में शांति बहाल करने को लेकर भी प्रचंड को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**












Click it and Unblock the Notifications