ताज को उड़ाना चाहते थे आतंकी

असल में आतंकवादी 1903 में बने होटल ताज पैलेस को उड़ाना चाहते थे। यह खुलासा ताज के अंदर चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान हुआ। एनएसजी अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह ताज में अलग-अलग जगह विस्फोटक बरामद हो रहे हैं।
उससे यह साफ हो गया है कि आतंकियों के मकसद लोगों की जान लेने के साथ ताज को उड़ाना भी था। इसका सबसे बड़ा प्रमाण शुक्रवार की शाम को तब मिला जब ताज होटल के बेसमेंट में एक बोरी आरडीएक्स बरामद हुआ।
वहीं ताज के पास भी दो बोरी आरडीएक्स बरामद हुआ है। भारतीय सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स (एनएसजी) के जवानों ने आतंकवादियों को उनके मनसूबों में कामयाब नहीं होने दिया।
एनएसजी अधिकारियों के मुताबिक ताज का बाहरी ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है। ताज की सुंदर इमारत में खून के धब्बे छोड़ गये आतंकियों ने सबसे ज्यादा नुकसान छठी मंजिल को पहुंचाया है। यहां के कई कमरों को आग के हवाले करने के साथ-साथ जगह-जगह धमाके किये। इस मंजिल के अंदरूनी हिस्से में भारी क्षति पहुंची है।
ताज के कमरों में विस्फोटक जमा किये
आतंकवादियों ने ताज पर हमले की वारदात को एक दिन में अंजाम नहीं दिया, बल्कि इसके लिए कई दिन पहले से तैयारियां की गईं। ताज में चल रहे सर्च ऑपरेशन में यह बात सामने आयी है कि यहां कई दिन पहले से आकर आतंकियों ने विस्फोटक जमा कर लिया था।
सर्च ऑपरेशन के दौरान एक कमरे में भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ बरामद किये गये हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इतना विस्फोटक पदार्थ एक दिन में इकठ्ठा नहीं किया जा सकता है।
होटल ताज के अंदर का नजारा काफी भयावह है। आम पब्लिक और मीडिया को अंदर जाने की मनाही है। होटल में फंसे हुए वो लोग जो बाहर आ गये हैं, उन्होंने बताया कि होटल के अंदर का पूरा इंटीरियर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।
ताज के अंदर कई ग्रेनेड अभी भी बरामद किये जा रहे हैं। उन सभी ग्रेनेड का कंट्रोल्ड एक्सप्लोजन कराया जा रहा है। ताज के कई कमरों में आग अभी भी सुलग रही है। यही कारण है कि ऑपरेशन ताज को अभी खत्म नहीं माना जा रहा है।












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