ताज की मरम्मत में लगेंगे 5 अरब रुपए

वास्तुकला के इस शानदार नमूने का मूल रूप लौटाने में 12 महीने से अधिक समय लग सकता है। वास्तुकला के विशेषज्ञों और योजनाकारों के मुताबिक बारीक और अनूठी पच्चीकारी से लैस इस धरोहर के निर्माण में मूरीश, ओरिएंटल एवं फ्लोरेंटाइन शैलियों का इस्तेमाल किया गया है। वर्ष 1903 में तामीर हुई इस इमारत की मरम्मत में बेहद अनुभवी विशेषज्ञों और दक्ष कारीगारों की जरूरत पड़ेगी। इसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की विशेषज्ञता की भी जरूरत पड़ेगी।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्चर के उप प्रमुख पांडुरंग पोटनिस कहते हैं, "मरम्मत के पारंपरिक तरीके से ही काम नहीं चलेगा। इसमें हर तरह की बारीकी पर ध्यान देना होगा। मेरा अनुमान यह है कि इस पर करीब 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे।"
उनके मुताबिक सबसे पहले इस होटल को हुई क्षति का ब्लूपिंट्र तैयार करना होगा। आईआईटी दिल्ली में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख ए़ के. नागपाल का भी मानना है कि इस इमारत को उसका मूल रूप लौटाना असाधारण चुनौती है।
वैसे, उन्होंने इसकी पुष्टि की कि वह ऐसी मरम्मत परियोजना के लिए परामर्श देते रहे हैं। आर्किटेक्च र डिजाइन कंपनी सेविंग केटेलिस्ट के प्रमुख राजेश थंबी कहते हैं कि इसकी मरम्मत पर प्रति वर्ग फुट 1500-2000 रुपए खर्च हो सकते हैं।












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