ब्लैक कैट कमांडो की भूमिका को देश ने सराहा

नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। मुंबई में आतंकवादी हमलावरों को सफलतापूर्वक मार गिराने के बाद पूरी दुनिया का ध्यान एशिया की सबसे श्रेष्ठ आतंकवाद विरोधी इकाई राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के कमांडो की ओर गया है।

नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। मुंबई में आतंकवादी हमलावरों को सफलतापूर्वक मार गिराने के बाद पूरी दुनिया का ध्यान एशिया की सबसे श्रेष्ठ आतंकवाद विरोधी इकाई राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के कमांडो की ओर गया है।

दिल्ली पुलिस से दिए गए दो सुरक्षा गार्डो द्वारा वर्ष 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक ऐसे बल का जन्म हुआ जो केवल अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के अलावा शहरी आतंकवाद के खतरे से निपटने जैसे काम कर सके।

इन्हीं परिस्थिति में ब्लैक कैट्स कमांडो का जन्म हुआ। लेकिन लेकिन शीघ्र ही उनकी मांग बढ़ गई और सभी राजनेता ब्लैक कैट कमांडो की सुरक्षा से लैस होने की इच्छा करने लगे। जल्दी ही ब्लैक कैट कमांडो ने पाया कि वे जिस काम को करने के लिए तैयार किए गए हैं, उसकी बजाय वे महत्वपूर्ण व्यक्तियों के व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड बनकर रह गए हैं।

राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके सलाहकारों ने उन पर एक विशेष बल बनाने के लिए जोर डाला जो प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हो। इससे स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) का जन्म हुआ।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा से हटने के बाद एनएसजी ने खुद को विशेष प्रकार के कार्यो के लिए तैयार करना आंरभ किया। इसने खुद को उन परिस्थितियों में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए तैयार किया, जिसमें अन्य अर्धसैनिक बल और पुलिस के जवान नहीं कर सकते। इसकी एक विशेष शाखा अपहरण विरोधी और बचाव की कार्रवाइयों की विशेषज्ञ है।

ब्रिटेन की एसएएस (स्पेशल एयर स्क्वै ड्रन) और जर्मनी की जीएसजी-9 के समान एनएसजी के दो भाग हैं : स्पेशल एक्शन ग्रुप (एसएजी) और स्पेशल रेंजर ग्रुप (एसआरजी)।

एसएजी ,एनएसजी का 54 प्रतिशत हिस्सा है और इसमें केवल सेना के जवान चुने जाते हैं। एसआरजी के जवानों का चुनाव केंद्रीय पुलिस संगठनों जैसे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआपीएफ), इंडो-तिब्बत बार्डर पुलिस (आईटीबीपी) और त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) से किया जाता है।

एनएसजी को हमेशा युवा बनाए रखने के लिए इसके जवानों को तीन से पांच वर्ष की सेवा के बाद उनके मूल बल में वापस भेज दिया जाता है।

दिल्ली से 50 किलोमीटर दूर मानसेर स्थित एनएसजी केंद्र पर पहले 90 दिन के कमांडो प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने वालों को ही आगे विशेष प्रशिक्षण के लिए चुना जाता है। एनएसजी विमानों को स्काई मार्शल की सेवाएं भी उपलब्ध कराते हैं। जो विमान अपहरण के खतरों को दूर करते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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