राजस्थान के मंदिर में मची भगदड़ में मरने वालों की संख्या 144 हुई (लीड-5)
जोधपुर, 30 सितम्बर (आईएएनएस)। राजस्थान के जोधपुर शहर में प्रसिद्ध मेहरानगढ़ किले के चामुंडा माता मंदिर में मंगलवार तड़के मची भगदड़ में कम से कम 144 लोगों की मौत हो गई और 300 घायल हो गए।
अधिकारियों के अनुसार यह देश में हुई इस तरह की कुछ सबसे दुखद दुर्घटनाओं में यह एक है।
मारे जाने वाले अधिकतर पुरुष हैं। यह हादसा उस समय हुआ जब लोग पूजा के बाद मंदिर से लौट रहे थे। पुरुषों की कतार में लगे एक अवरोधक के टूट जाने से लोग एक दूसरे पर गिरने लगे, जिससे भगदड़ मच गई।
नवरात्र की शुरुआत के कारण मंदिर में हजारों लोग पूजा करने आए थे। राज्य के गृह सचिव एस. एन. थानवी ने आईएएनएस को बताया कि हादसे में कम से कम 144 लोग मारे गए हैं और 300 घायल हुए हैं।
घायलों को जोधपुर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती करवाया गया है। राज्य के गृहमंत्री जी. सी. कटारिया ने इसे बड़ा हादसा करार दिया है।
कटारिया ने कहा कि पुरुषों की कतार में लगे अवरोधक के टूटने और एक पुरुष के गिर जाने के बाद भगदड़ मच गई। उन्होंने कहा, "लोग एक दूसरे पर गिरने लगे थे।"
पुलिस सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार पूजा के लिए मंदिर के खुलने के तीन घंटे बाद करीब छह बजे भगदड़ मची। दुर्घटना के समय मंदिर में करीब 10 हजार लोग थे। प्रत्यक्षदशिर्यो के अनुसार करीब आधे घंटे तक भगदड़ जैसी स्थिति बनी रही।
घटना के घंटों बाद लोग अपने परिचितों और रिश्तेदारों की खोज में परेशान होकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल दौड़ते रहे।
इस त्रासदी पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शोक प्रकट किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार उन्होंने शोकसंतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है। प्रधानमंत्री इस समय फ्रांस में हैं।
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने भी पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है। विश्व हिंदू परिषद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह बड़े त्यौहारों के अवसर पर ऐसी त्रासद घटनाओं को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन दल का गठन करे।
गौरतलब है कि सन 1460 में जोधपुर के तत्कालीन राजा राव जोधा ने मेहरानगढ़ किले के चामुंडा मंदिर में देवी की प्रतिमा स्थापित की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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