ै महज 10 प्रतिशत कलाकृतियां प्रदर्शित कर पाता है राष्ट्रीय संग्रहालय
नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। राजधानी स्थित देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय संग्रहालय में जगह की इतनी कमी है कि वह अपनी 200,000 कलाकृतियों में से महज दस प्रतिशत ही प्रदर्शित कर पाता है। उसके परिसर का ज्यादातर हिस्सा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई)के पास है।
नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। राजधानी स्थित देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय संग्रहालय में जगह की इतनी कमी है कि वह अपनी 200,000 कलाकृतियों में से महज दस प्रतिशत ही प्रदर्शित कर पाता है। उसके परिसर का ज्यादातर हिस्सा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई)के पास है।
इसी वजह से संग्रह की विस्तार संबंधी योजना पर परवान नहीं चढ़ रही है। संग्रहालय की महज दस फीसदी कलाकृतियां प्रदर्शित की गई है, जबकि शेष संग्रहालय के स्टोर में रखी हैं।
संस्कृति मंत्री अंबिका सोनी ने कहा है कि एएसआई जल्द ही इस परिसर को खाली कर देगा, ताकि संग्रहालय के विस्तार की योजना को अमली जामा पहनाया सके।
सोनी ने आईएएनएस को बताया,"कलाकृतियों को प्रदर्शित करने के लिए हमें और ज्यादा जगह की जरूरत है। एएसआई जल्द ही इस परिसर को खाली कर देगा और संग्रहालय का व्यापक विस्तार करेंगे।"
उन्होंने कहा कि जगह की कमी की वजह से संग्रहालय सिंधु घाटी सभ्यताकालीन महत्वपूर्ण मूर्तियों और मध्य एशियाई स्मारकों को प्रदर्शित नहीं कर पा रहे हैं।
सोनी ने कहा कि संग्रहालय की विस्तार योजना राष्ट्रमंडल खेलों को ध्यान में रखते हुए नहीं बनाई गई है,क्योंकि इसे पूरा होने में कम से कम पांच बरस लगेंगे।
राष्ट्रीय संग्रहालय के प्रदर्शनी एवं जनसंपर्क निदेशक आर. आर. एस. चौहान ने बताया कि संग्रहालय के पास 200,000 कलाकृतियों का संग्रह है, लेकिन वह उनमें से 10 प्रतिशत को ही प्रदर्शित कर पाते हैं। उन्होंने कहा, "हमारे पास बहुत महत्वपूर्ण कलाकृतियों का संग्रह है और हम उसे प्रदर्शित करने के लिए बेताब हैं। यह तभी होगा, जब हम संग्रहालय का आधुनिकीकरण कर सकेंगे।
उधर एएसआई की निदेशक अशुं वैष का कहना है कि उनका विभाग पहले परिसर इसलिए खाली नहीं कर सका, क्योंकि उसे तिलक मार्ग में अपना परिसर बनवाने के लिए शहरी विकास मंत्रालय से अनुमति लेनी जरूरी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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