हिमाचल में बौद्ध सर्किट के बदहाल रास्तों के कारण पर्यटन व्यवसाय प्रभावित

शिमला, 26 जुलाई (आईएएनएस)। बौद्ध सर्किट नाम से चर्चित हिमाचल प्रदेश के आदिवासी इलाकों तक पहुंचने वाली जर्जर सड़कें और प्रदूषित वायु यहां के पर्यटन व्यवसाय को नुकसान पहुंचा रही हैं।

शिमला, 26 जुलाई (आईएएनएस)। बौद्ध सर्किट नाम से चर्चित हिमाचल प्रदेश के आदिवासी इलाकों तक पहुंचने वाली जर्जर सड़कें और प्रदूषित वायु यहां के पर्यटन व्यवसाय को नुकसान पहुंचा रही हैं।

हिमाचल के तटीय क्षेत्रों के बौद्ध स्थलों किन्नौर, स्पीति और लाहौल में कई मठ हैं। इनमें एक हजार साल पुराने टैबो भी हैं, जिसे हिमालय, धनकार, गुंगरी, लिडांग, हिकिम, सगनाम और नाको का अजंता भी कहा जाता है।

जुलाई अंत में पर्यटक इस सर्किट में आते हैं और ठंड में लौट जाते हैं। वर्ष 1992 में विदेशियों के लिए इसे खोला गया, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों से जम्मू और कश्मीर के लद्दाख तक जाने के लिए राष्ट्रीय-राजमार्ग पर दुपहिया वाहन चलाना न तो आसान है और न ही आरामदायक।

शिमला के एक ट्रैवल एजेंट नरेश बरागटा के अनुसार सड़कों की हालत ऐसी है कि दुर्घटना का खतरा हमेशा ही बना रहता है, लेकिन सरकार का ध्यान इस ओर जाता ही नहीं है।

नरेश के मुताबिक पर्यटक मनाली के बजाए राजधानी शिमला की ओर से बौद्ध सर्किट जाना पसंद करते हैं। इजरायल, जर्मनी, ब्रिटेन सहित विश्व के कई देशों के लोगों को यहां के ऐतिहासिक और प्राचीन मठ आकर्षित करते हैं।

'मनाली होटेलियर्स एसोसिएशन' के सचिव अनिल कुमार के अनुसार जम्मू और कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण इन सुदूर क्षेत्रों में पर्यटक कम आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर में हिंसा की घटनाओं में कमी आने के बाद विदेशियों के यहां आने में 20-25 प्रतिशत तक कमी आई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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