'डूसू चुनाव राज्य व केंद्रीय राजनीति की पाठशाला है'
नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) कार्यालय में चहलपहल बढ़ गई है। परिसर के बाहर व भीतर छात्रसंघ चुनाव के संभावित उम्मीदवारों के पोस्टर चस्पा किए जा रहे हैं और छात्र नेता सभी पुराने वादों को पूरा करने का दावा कर रहे हैं।
फिलहाल विश्वविद्यालय छात्र संघ पर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) का कब्जा है और इसके नेता छात्रों के करीब रहने का दावा करते हैं। छात्र संघ की अध्यक्ष अमृता बाहरी ने आईएएनएस से कहा, "हमलोगों ने अपने कार्यकाल के दौरान छात्रों से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लिया और सभी वादों को पूरा किया है।"
विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के विचार उनसे जुदा हैं। विश्वविद्यालय में एम फिल कर रहीं मीनाक्षी कहती हैं कि चुनाव के समय छात्र नेता बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन प्रवासी छात्रों को होने वाली कठिनाइयों की तरफ उनका ध्यान नहीं जाता। यहां शोध छात्राओं को भी छात्रावास नहीं मिलता है। विश्वविद्यालय परिसर से बाहर छात्राएं खुद को महफूज नहीं मानती हैं, लेकिन छात्र नेताओं को इसकी फिक्र नहीं है।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से छात्रावासों की कमी महसूस की जा रही है। प्रत्येक वर्ष डूसू चुनाव के दौरान विभिन्न संगठनों के छात्र नेता इसे मुद्दा बनाकर प्रवासी छात्रों का विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं।
खालसा महाविद्यालय में गणित से स्नातक करने वाले एक छात्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "परिसर में सिगरेट पीने पर प्रतिबंध है, लेकिन चुनाव के समय छात्रावासों में सिगरेट तो क्या, शराब की बोतलें भी बांटी जाती हैं। राजनीति की शुरुआत ही अब गलत तरीके से होती है। डूसू चुनाव में यह साफ नजर आता है।"
हिंदी से एम फिल कर रही कनकलता ने कहा, "छात्र नेताओं की गरिमा कम हुई है, वे छात्रों के साथ खड़े नहीं होते बल्कि झूठे वादे करते हैं।" विश्वविद्यालय के कई छात्र-छात्राओं का मानना है कि छात्र राजनीति राज्य व केंद्रीय राजनीति की पाठशाला बनकर रह गई है। संसद में कई ऐसे नेता हैं जिनकी किस्मत छात्र राजनीति से ही चमकी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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